More
    Homeराजस्थानजयपुरन्यूनतम समर्थन मूल्य की सार्थकता के लिए संपूर्ण खरीद जरूरी: रामपाल जाट

    न्यूनतम समर्थन मूल्य की सार्थकता के लिए संपूर्ण खरीद जरूरी: रामपाल जाट

    सरसों खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को नुकसान, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाने की मांग

    जयपुर। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वास्तविक सार्थकता तभी है जब सरकार किसानों की उपज की संपूर्ण खरीद सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि बिना खरीद के एमएसपी की घोषणा करना किसानों के साथ अन्याय है।

    मासलपुर में जारी बयान में रामपाल जाट ने कहा कि सरसों की फसल बाजार में आ चुकी है, लेकिन उसकी खरीद की तारीख अभी तक तय नहीं की गई है। इससे किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि सरकार ने एमएसपी घोषित कर रखा है।

    उन्होंने कहा कि दूसरी ओर सरकार ने गेहूं की खरीद 15 मार्च से शुरू करने की घोषणा कर दी है, जबकि अभी गेहूं की कटाई भी शुरू नहीं हुई है। किसानों की लंबे समय से मांग है कि सरसों की खरीद 1 फरवरी से शुरू की जाए, लेकिन पिछले पांच वर्षों से इस मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि बिना खरीद के एमएसपी की घोषणा करना “थोथा चना बाजे घणा” जैसी स्थिति है।

    रामपाल जाट ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा तभी सार्थक है जब किसानों को उसका लाभ सुनिश्चित रूप से मिले। इसके लिए एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा गठित समिति के उपसमूह ने 21 अप्रैल 2023 को भी इस संबंध में अनुशंसा कर दी थी, लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    उन्होंने कहा कि सरकार वर्ष 1968 से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य को गारंटीड मूल्य घोषित करती रही है और संसद में भी कई बार यह आश्वासन दिया गया है कि किसानों को घोषित एमएसपी से कम कीमत पर अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

    रामपाल जाट ने आरोप लगाया कि भारत सरकार व्यापारिक समझौतों के तहत देश के बाजारों को अमेरिका जैसे देशों के लिए खोलने को लेकर अधिक सक्रिय दिखाई देती है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए उतनी गंभीरता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि इसी कारण निर्यात नीति के केंद्र में किसानों के हित नहीं रह जाते।

    उन्होंने यह भी कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ने कई बार एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाने, खरीद सुनिश्चित करने और आयात-निर्यात नीति को किसानों के हितों के अनुकूल बनाने की अनुशंसा की है। इसके बावजूद इन सिफारिशों को लागू नहीं किया गया।

    रामपाल जाट ने मांग की कि पिछले 60 वर्षों में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग द्वारा किसानों के हित में की गई सिफारिशों को लागू करने की स्थिति की समीक्षा सार्वजनिक की जाए, ताकि किसानों को यह पता चल सके कि उनकी भलाई के लिए की गई अनुशंसाओं पर सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here