स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में भारी कमी, विशेषज्ञ बोले—सिर्फ करीब 20 दिन का तेल भंडार बचा
वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के सामने एक नया ऊर्जा संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र के आसमान में फाइटर जेट्स मंडरा रहे हैं और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की एक पुरानी रणनीतिक चूक अब उसके लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को समय रहते भरने का मौका गंवा चुका है। जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें कम थीं, उस समय रिजर्व को भरने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। अब जब ईरान के साथ तनाव और युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है, तब अमेरिका के पास आपात स्थिति के लिए पर्याप्त तेल भंडार नहीं बचा है।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका इस समय एक बड़े ‘ऑयल शॉक’ की दहलीज पर खड़ा है। इसका असर अब आम जनता पर भी दिखाई देने लगा है, जहां पेट्रोल और ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (एसपीआर) वर्ष 1974 में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य किसी भी बड़े युद्ध, वैश्विक संकट या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में देश में तेल की उपलब्धता बनाए रखना था।
बताया जाता है कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के समय पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए इस रिजर्व से बड़ी मात्रा में तेल निकाला गया था। बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद इस भंडार को दोबारा भरने का वादा किया था, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक यह वादा पूरी तरह लागू नहीं हो पाया।
वर्तमान में अमेरिका के स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। इसकी कुल क्षमता लगभग 71.4 करोड़ बैरल है, जबकि अभी इसमें करीब 41.5 करोड़ बैरल तेल ही बचा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह भंडार अमेरिका की जरूरतों के हिसाब से केवल लगभग 20 दिनों के लिए ही पर्याप्त माना जा रहा है।
इधर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को भी झकझोर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार तेहरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे पर जवाबी हमले किए हैं, जिससे तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जताई जा रही है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि ईरान ने इस समुद्री मार्ग को बंद कर दिया तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है और अमेरिका के लिए अपने तेल भंडार को फिर से भरना बेहद कठिन हो जाएगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट गहराता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर पड़ेगा।
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