More
    Homeराजस्थानअलवरपांडुपोल हनुमान मंदिर: जहां हनुमानजी ने तोड़ा था भीम का घमंड

    पांडुपोल हनुमान मंदिर: जहां हनुमानजी ने तोड़ा था भीम का घमंड

    महाभारत काल से जुड़ा पांडुपोल हनुमान मंदिर आस्था का केंद्र, सरिस्का की पहाड़ियों में हर साल भरता है लख्खी मेला

    थानागाजी, गोपेश शर्मा। राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व की घनी पहाड़ियों के बीच स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम है। यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है और श्रद्धालुओं के बीच इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है। मान्यता के अनुसार यही वह स्थान है, जहां भगवान हनुमान ने महाबली भीम का घमंड तोड़ा था।

    कहा जाता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम एक दिन सरिस्का के जंगलों से गुजर रहे थे। रास्ते में उन्हें एक वृद्ध वानर लेटा हुआ दिखाई दिया, जिसकी लंबी पूंछ मार्ग को अवरुद्ध कर रही थी। भीम ने वानर से पूंछ हटाने को कहा, लेकिन वानर ने शांत स्वर में कहा कि वह वृद्ध है और यदि चाहें तो स्वयं पूंछ हटाकर निकल जाएं।

    भीम ने पूरी शक्ति लगाकर पूंछ हटाने का प्रयास किया, लेकिन वह पूंछ हिल भी नहीं सकी। तब उन्हें आश्चर्य हुआ कि एक साधारण वानर की पूंछ वे क्यों नहीं हटा पा रहे। इसके बाद उन्होंने वानर से अपना वास्तविक स्वरूप दिखाने का अनुरोध किया। तभी वह वानर अपने दिव्य रूप में प्रकट हुए और वह स्वयं भगवान हनुमान थे।

    हनुमानजी के दिव्य रूप को देखकर भीम उनके चरणों में नतमस्तक हो गए। हनुमानजी ने भीम के अहंकार को शांत करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया कि महाभारत युद्ध के दौरान वे अर्जुन के रथ पर ध्वजा के रूप में विराजमान रहेंगे और पांडवों की विजय में सहायक बनेंगे।

    आज भी इसी स्थान पर पांडुपोल हनुमान मंदिर स्थित है, जहां भगवान हनुमान की लेटी हुई विशाल प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि इस प्रतिमा की स्थापना पांडवों द्वारा की गई थी। मंदिर परिसर के पास पहाड़ियों से निकलने वाला झरना और प्राकृतिक वातावरण इस स्थान को और अधिक पवित्र और आकर्षक बनाता है।

    मंदिर तक पहुंचने के मार्ग में एक विशाल पत्थर का द्वार ‘बड़ा पोल’ भी स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भीम ने अपनी गदा से पहाड़ तोड़कर यह रास्ता बनाया था, जिसके कारण इस स्थान का नाम पांडुपोल पड़ा।

    सरिस्का के कोर एरिया में स्थित होने के कारण यहां प्राकृतिक वातावरण बेहद मनमोहक है। हर मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां हनुमानजी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को यहां भव्य लख्खी मेले का आयोजन होता है, जिसमें राजस्थान सहित दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    मंदिर के महंत बाबूलाल शर्मा के अनुसार पांडुपोल हनुमान मंदिर देश-दुनिया में अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां आने वाले श्रद्धालु हनुमानजी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह स्थान अलवर जिले के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here