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    तुर्की में 5.5 तीव्रता का भूकंप: घरों से बाहर निकले लोग, कम गहराई ने बढ़ाई कंपन की तीव्रता

    निक्सा। मध्य तुर्की में शुक्रवार तड़के भूकंप के तेज झटकों ने एक बार फिर लोगों को खौफजदा कर दिया है। तुर्की की डिजास्टर एंड इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी के अनुसार, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई। भूकंप उस समय आया जब लोग गहरी नींद में थे, जिससे निक्सार और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। दहशत के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
    प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप सुबह ठीक 3:35 बजे महसूस किया गया। इसका केंद्र टोकाट प्रांत का निक्सार कस्बा था। भूकंप की सबसे चिंताजनक बात इसकी गहराई रही, जो जमीन से मात्र 6.4 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र की गहराई कम होने के कारण ही झटके इतने शक्तिशाली और व्यापक महसूस किए गए। कंपन इतना तेज था कि टोकाट के अलावा आसपास के कई अन्य प्रांतों में भी इसे स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। राहत की बात यह है कि प्राथमिक जांच और आपदा प्रबंधन टीमों की शुरुआती रिपोर्टों में अभी तक किसी भी जान-माल के नुकसान या बड़ी इमारतों के गिरने की सूचना नहीं मिली है। आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई प्रतिकूल घटना सामने नहीं आई है, लेकिन आपातकालीन टीमें पूरी तरह अलर्ट पर हैं और ग्रामीण इलाकों में स्थिति का सर्वे कर रही हैं। भले ही प्रशासन सुरक्षा का भरोसा दे रहा है, लेकिन स्थानीय आबादी में भारी डर का माहौल है। कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे गिरते तापमान के बावजूद, निक्सार और टोकाट के निवासी अपने घरों में लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर अलाव जलाकर या अपनी कारों के भीतर बैठकर सुबह होने का इंतजार करते देखे गए। उन्हें डर है कि मुख्य झटके के बाद आने वाले आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के छोटे झटके) उनकी इमारतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
    शुक्रवार के इस भूकंप ने तुर्की के लोगों के मन में फरवरी 2023 की उस भयावह त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं, जब 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने देश के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में तबाही मचाई थी। उस समय 53,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। तुर्की की भौगोलिक स्थिति प्रमुख फॉल्ट लाइन्स के ऊपर होने के कारण यहाँ अक्सर भूकंप आते रहते हैं, जिससे सुरक्षा और आपदा प्रबंधन हमेशा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन सड़कों पर मौजूद लोगों के लिए सहायता और गर्म कपड़ों का इंतजाम करने में जुटा है।

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