
समाज में धर्म की जड़ें सशक्त होने से राष्ट्र बनता है समृद्ध: डॉ. नरेश पुरी
अक्षत जैन, जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर की पावन धरा पर आयोजित संत संसद कार्यक्रम ने धर्म, राष्ट्र और संस्कृति के संगम का प्रेरणादायक संदेश दिया। इस आयोजन में मेहंदीपुर बालाजी ट्रस्ट के महंत 1008 डॉ. श्री नरेश पुरी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. नरेश पुरी महाराज ने धर्म और राष्ट्रवाद के बीच गहरे संबंध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जब समाज में धर्म की जड़ें मजबूत होती हैं, तभी राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है। जयपुर में इस प्रकार के आयोजन को उन्होंने राष्ट्रवादी चेतना का प्रतीक बताया।
उन्होंने नेटवर्क 10 की इस पहल की सराहना करते हुए संयोजक एवं एडिटर इन चीफ संजय गिरी की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धर्म संसद नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को जागृत करने का सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जो भारतीय संस्कृति में हर शुभ कार्य का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान संतों ने एक साथ परंपरा का निर्वहन करते हुए यह संदेश दिया कि हर बड़े परिवर्तन की शुरुआत श्रद्धा और संस्कारों से होती है।
अपने उद्बोधन में महंत नरेश पुरी महाराज ने गौ रक्षा के लिए सशक्त कानून बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गौ सेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है।
उन्होंने सनातन धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि जब तक समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा, तब तक कोई भी चुनौती उसे कमजोर नहीं कर सकती।
इस अवसर पर डॉ. नरेश पुरी महाराज ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित देशभर से आए संतों और धर्माचार्यों से आत्मीय मुलाकात की। यह संवाद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के भविष्य को लेकर गंभीर मंथन का प्रतीक बना।
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