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    राष्ट्रीय फलक पर कोरिया- ‘मन की बात’ में 5 प्रतिशत जल संरक्षण मॉडल की सराहना

    कोरिया :  देश के प्रधानमंत्री द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में कोरिया जिले के अभिनव जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख किए जाने के बाद यह जिला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। किसानों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से विकसित '5 प्रतिशत मॉडल' ने न केवल जल संकट का समाधान प्रस्तुत किया है, बल्कि सतत विकास की दिशा में एक मजबूत उदाहरण भी स्थापित किया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कोरिया जिले के किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे नवाचार बड़े बदलाव ला सकते हैं।उन्होंने बताया कि किसानों ने अपने खेतों में छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाकर वर्षा जल को खेतों में ही रोकने का प्रभावी उपाय किया, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

    5 प्रतिशत मॉडल- छोटे प्रयास, बड़ा परिणाम
    कोरिया जिले में लागू '5 प्रतिशत मॉडल' के तहत किसानों ने अपनी भूमि का पांच प्रतिशत हिस्सा जल संरचनाओं के निर्माण के लिए समर्पित किया। इस पहल में छोटे-छोटे सीढ़ीदार तालाब, डबरियां और सोखता गड्ढे बनाए गए, जिससे वर्षा जल का संरक्षण संभव हो पाया। इस मॉडल को 1200 से अधिक किसानों ने अपनाया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।

    जनभागीदारी बनी सफलता की कुंजी
    इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता जनभागीदारी रही। महिलाओं ने 'नीर नायिका' और युवाओं ने 'जल दूत' के रूप में जिम्मेदारी निभाई। ग्राम सभाओं के माध्यम से योजनाओं का विकेंद्रीकरण किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और क्रियान्वयन की प्रक्रिया मजबूत हुई। इससे समुदाय स्वयं इस अभियान का नेतृत्वकर्ता बन गया।

    भूजल पुनर्भरण में उल्लेखनीय उपलब्धि
    वर्ष 2025 में इस अभियान के तहत लगभग 2.8 मिलियन क्यूबिक मीटर जल का भूजल में पुनर्भरण किया गया, जो सैकड़ों बड़े तालाबों के बराबर है। छत्तीसगढ़ वॉटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जिले में भूजल स्तर में 5.41 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

    वर्षा अधिक, फिर भी जल संकट-अब समाधान
    कोरिया जिले में लगभग 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद भू-आकृतिक परिस्थितियों के कारण जल का तेजी से बहाव होता था। इस कारण भूजल पुनर्भरण सीमित था। 'आवा पानी झोंकी' अभियान के माध्यम से इस समस्या का समाधान खोजा गया और वर्षा जल को रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

    मनरेगा और सामुदायिक प्रयासों का समन्वय
    वर्ष 2026 तक जिले में 20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण या प्रगति पर हैं। इनमें 17,229 कार्य सामुदायिक स्तर पर और 3,383 संरचनाएं मनरेगा के अंतर्गत बनाई गई हैं। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़े और जल संरक्षण को गति मिली।

    राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
    इस मॉडल को केंद्रीय स्तर पर भी सराहना प्राप्त हुई है और इसे अन्य राज्यों में लागू करने योग्य बताया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि कोरिया मॉडल भविष्य में देश के अन्य जल- संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए मार्गदर्शक बन सकता है। इसके पहले भी मन की बात में सोनहनी शहद का जिक्र कर चुके हैं।

    प्रशासन का दृष्टिकोण-हर बूंद की सुरक्षा
    जिला प्रशासन का मानना है कि इस सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं जल संरक्षण का संकल्प लेता है, तो परिणाम दीर्घकालिक और व्यापक होते हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि हर बूंद को सहेजकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

    ग्रामीणों, किसानों व जनप्रतिनिधियों के समन्वित प्रयास से यह मॉडल राष्ट्रीय फलक पर
    कलेक्टर चन्दन त्रिपाठी ने इस उपलब्धि का श्रेय जिले के ग्रामीणों, किसानों व।जनप्रतिनिधियों को देते हुए कहा कि इन लोगों के समन्वित व प्रयास की वजह से ही यह मॉडल राष्ट्रीय फलक पर आया है। जल संरक्षण का कोरिया मॉडल यह सिद्ध करता है कि जब वैज्ञानिक सोच, प्रशासनिक नेतृत्व और जनता की भागीदारी एक साथ आती है, तो किसी भी चुनौती का समाधान संभव है। यह पहल अब जल संरक्षण को एक जन आंदोलन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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