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    खाड़ी संकट का असर: भारत के 10.68 अरब डॉलर कृषि-डेयरी निर्यात पर खतरा

    नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में अमरीका-ईरान संघर्ष से तेल-गैस आयात में परेशानी के अलावा भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र के 10.68 अरब डॉलर के निर्यात पर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा जैम-ज्वैलरी, हैंंडीक्राफ्ट व छोटे उद्योगों (एमएसएमई) का निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पश्चिम एशिया के देशों को होने वाला यह निर्यात मांग, लॉजिस्टिक्स बाधाओं और बढ़ती लागत के चलते मुश्किल में है। इससे मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात व कर्नाटक के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के निर्यातक परेशान हैं। केंद्र सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही में बाधा से उपजे हालात में लौट रहे निर्यात जहाजों के लिए विशेष राहत के उपाय शुरू किए हैं लेकिन निर्यातकों को और मदद की उम्मीद है। दरअसल, मध्य पूर्व, विशेषकर गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देश जैसे यूएई, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन और इसके साथ ईरान, इराक और यमन, भारतीय कृषि और डेयरी उत्पादों के प्रमुख बाजार हैं। इन देशों में भारत के कुल कृषि निर्यात का करीब 20.5% हिस्सा जाता है। करीब एक महीने बाद भी हालात सामान्य नहीं होने से भारतीय निर्यातकों पर संकट गहराने लगा है।

    अंतर मंत्रालयी समूह सक्रिय, मिल सकती है राहत

    स्थिति की निगरानी के लिए सरकार ने युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद ही ‘सप्लाई चेन लचीलापन’ के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) सक्रिय कर दिया था और बाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्री समूह बनाया है। सूत्रों ने बताया कि संकट और लंबा खिंचा तो सरकार एमएसएमई और अर्थव्यवस्था के कमजोर वर्गों के लिए राहत पैकेज की घोषणा कर सकती है, ताकि उन्हें बचाने और घरेलू बाजार में मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में मदद मिले।

    सरकार ने किए निर्यातकों को राहत के उपाय

    रिलीफ योजना (19 मार्च): डीजीएफटी ने निर्यात जोखिम कम करने को 497 करोड़ रुपए की विशेष योजना शुरू की।

    समयसीमा में राहत: बिना अतिरिक्त शुल्क के निर्यात दायित्व पूरा करने की समय सीमा 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाई ।

    कस्टम प्रक्रिया आसान: कस्टम बोर्ड ने फंसे माल के लिए सरल क्लीयरेंस, ट्रांजिट और री-एक्सपोर्ट की सुविधा दी।

    लॉजिस्टिक व कार्गो को राहत: हॉर्मूज से लौट रहे कार्गो के लिए बर्थिंग, ऑफलोडिंग, शिपिंग बिल रद्द करने और बैक-टू-टाउन की सुविधा, जांच-जुर्माना माफ

    बंदरगाहों पर विशेष व्यवस्था: प्रमुख बंदरगाहों पर 24×7 नोडल अधिकारी, अतिरिक्त स्टोरेज, जल्दी खराब होने वाले सामान की प्राथमिकता और शुल्क में छूट जैसे कदम लागू किए गए।

    निर्यातकों ने व्यवधानों की रिपोर्ट दी: प्रसाद

    सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है, जिसमें भारत के बाहरी व्यापार, शिपिंग मार्गों और लॉजिस्टिक्स श्रृंखलाओं पर इसके प्रभाव भी शामिल हैं। निर्यातकों ने माल ढुलाई दरों में वृद्धि, युद्ध-जोखिम अधिभार लगाए जाने, कंटेनरों की कमी, शिपमेंट शेड्यूल में देरी और बंदरगाहों पर भीड़भाड़ जैसे व्यवधानों की सरकार को रिपोर्ट दी है।
    जितिन प्रसाद, वाणिज्य राज्य मंत्री (राज्यसभा में एक सवाल पर लिखित जवाब में दिया)

    राजस्थान: कंटेनर अटके, निर्यातकों पर आर्थिक बोझ

    राजस्थान के करीब 120 कंटेनर ओमान पोर्ट पर रोके जाने की जानकारी मिल रही है। राजस्थान से हैंडीक्राफ्ट व मसाले का निर्यात प्रभावित हुआ है। निर्यातक राजेश गुप्ता ने कहा कि हाल ही भेजे गए उनके दो कंटेनर सऊदी अरब पहुंचने के बजाय ओमान के पोर्ट पर ही उतार दिए गए। एक कंटेनर को वापस मंगाने में करीब तीन लाख रुपए तक का अतिरिक्त खर्च आएगा, जो निर्यातकों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ है।

    छत्तीसगढ़: चावल, सिल्क कोसा, हर्बल प्रोडक्ट अटका

    युद्ध की वजह से छत्तीसगढ़ से चावल के निर्यात में 20% का असर पड़ा है। चावल फिलहाल वाइजैक पोर्ट में अटका हुआ है। इसके अलावा स्पेशल स्टील, सिल्क कोसा, जड़ी बूटी का हर्बल प्रोडक्ट और बस्तर आर्ट के सामान का निर्यात भी बाधित हुआ है।

    मध्यप्रदेश: बासमती, डेयरी उत्पाद प्रभावित

    मध्यप्रदेश से बासमती चावल, डेयरी उत्पाद, मीट सहित फल-सब्जियों का निर्यात प्रभावित हुआ है। निर्यात रुकने ढाई से तीन लाख टन बासमती सहित अन्य माल बंदरगाह पर अटका है और गोदामों में भारी स्टॉक जमा है। चावल मिलर्स श्रीराम माहेश्वरी का कहना है किचावल निर्यातक परेशान हैं। शिप का भाड़ा 25 से 30% तक बढ़ गया है। घरेलू बाजार में दाम घट गए हैं।

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