कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर चल रही आंतरिक कलह के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विद्रोहियों को कड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को नारायणगढ़ में एक चुनावी रैली के दौरान कहा, “पार्टी टिकट न मिलने का मतलब विद्रोह नहीं होना चाहिए। टिकट न मिलने का यह अर्थ नहीं है कि किसी को पार्टी का विरोध करना चाहिए।” ममता बनर्जी ने कहा कि अनुशासन पार्टी का मुख्य स्तंभ है और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। नेताओं को एकजुट रहना चाहिए और जनसेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जो लोग जनता से जुड़े रहते हैं और उनके लिए काम करते हैं, उन्हीं के नाम पर टिकट के लिए विचार किया जाएगा। यदि उनका चयन नहीं होता है, तो नाराजगी का कोई कारण नहीं है।मुख्यमंत्री की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब तृणमूल कांग्रेस द्वारा उम्मीदवारों की सूची घोषित किए जाने के कुछ हफ्तों बाद भी आंतरिक कलह सामने आ रही है। कई निवर्तमान विधायकों ने सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया है, जिससे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है। इससे पहले कुछ दिन पहले ही पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विद्रोहियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि जो लोग आधिकारिक उम्मीदवारों को नुकसान पहुँचायेंगे या पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होंगे, उन्हें ‘रेड कार्ड’ दिखाकर स्थायी रूप से बाहर कर दिया जाएगा। उन्होंने जोर दिया था कि किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पार्टी तथा ममता बनर्जी के प्रति वफादारी ही प्राथमिकता होगी।
तृणमूल कांग्रेस ने आगामी चुनावों के लिए अपनी उम्मीदवार सूची में बड़े बदलाव किए हैं, जिसमें 74 मौजूदा विधायकों और चार मंत्रियों के टिकट काट दिए गए हैं। इन सभी ने हालांकि प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कई नेताओं ने खुलकर निराशा जताई है और कुछ ने राजनीति से संन्यास लेने तक का संकेत दिया है। ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी का अपमान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “हमें एक बार टिकट मिल सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर बार मिले। हमारा लक्ष्य लोगों के साथ खड़े होना और मिलकर काम करना होना चाहिए।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि असंतोष का सार्वजनिक प्रदर्शन मतदाताओं को पसंद नहीं आता और पार्टी नेतृत्व इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। ये बयान संकेत देते हैं कि चुनावों की तैयारी के बीच पार्टी नेतृत्व गुटबाजी के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है और अपने रैंकों के भीतर अनुशासनहीनता के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहा है।


