अलवर : दो दिगंबर जैन आचार्यों ने कहा- हत्या करवाना घोर पाप
अलवर। करुणावतार व अहिंसा के युग प्रवर्तक भगवान महावीर स्वामी की जयंती के पावन अवसर पर सत्ता से बेजुबान वन्य प्राणी नीलगायों को जीवनदान देने की आवाज कई जगह उठी।
अलवर में विराजित दिगंबर जैन आचार्य श्री आदित्य सागर जी महाराज एवं दिगंबर जैन आचार्य श्री विज्ञान भूषण जी महाराज ने कहा कि सही अर्थों में महावीर जयंती मनाना उन्हीं के लिए सार्थक है, जो महावीर के अहिंसा धर्म की अनुपालना करते हैं। जिनके भीतर मूक प्राणियों के प्रति दर्द और संवेदना नहीं, वे इंसान कहलाने योग्य नहीं हैं।
उन्होंने राजस्थान में वन्यजीव नीलगायों की हत्या से जुड़े कानूनों का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह सरासर घोर पाप और अधर्म है। सरकार में बैठे लोगों को ऐसे पापपूर्ण कानून तत्काल समाप्त करने चाहिए।
दोनों आचार्य सोमवार दोपहर श्री जैन नसिया जी मंदिर में राजस्थान नीलगाय रक्षा आंदोलन की टीम के साथ धर्मचर्चा कर रहे थे। उन्होंने इस बात पर गहरी पीड़ा व्यक्त की कि भारी जनविरोध के बावजूद सरकार मौन बैठी है।
जैन आचार्यों ने कहा कि नीलगाय हो या कोई अन्य जीव, उनकी सुरक्षा के लिए हम सभी को एकजुट रहना चाहिए, क्योंकि वे अपना दर्द किसी को बता भी नहीं सकते। महावीर के देश में नीलगाय जैसे पूर्णतः शाकाहारी और अहिंसक प्राणी की फसल सुरक्षा के नाम पर हत्या भारतीय संस्कृति का भी घोर अपमान है।
इस दौरान दिगंबर मुनिराज श्री आनंद सागर जी, मुनि श्री अजय सागर जी महाराज एवं मुनि शुभ सागर जी भी मौजूद रहे।
इधर महावीर जयंती के अवसर पर अलवर में सकल जैन समाज द्वारा निकाली गई भव्य स्वर्ण रथयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर नीलगायों की रक्षा के समर्थन में आवाज बुलंद की गई। श्री आदिनाथ जैन शिक्षण संस्थान के स्वागत मंच से वरिष्ठ समाजसेवी मगनचंद जैन ने राज्य सरकार से नीलगाय हत्या संबंधी कानून समाप्त करने की अपील की।
वहीं वीर चौक स्थित स्वागत मंच से पूर्व निशक्तजन आयुक्त खिल्लीलाल जैन ने कहा कि नीलगाय भी प्रकृति की धरोहर है और उसे भी गाय व शेर की तरह जीने का समान अधिकार है।
बाजाजा बाजार, पंसारी बाजार व गायत्री मंदिर रोड सहित विभिन्न स्थानों पर जैन समाज की संस्थाओं द्वारा नीलगाय हत्या कानून वापस लेने के नारे लिखे बड़े-बड़े बैनर प्रदर्शित किए गए। शाकाहारी समिति एवं जैन युवती मंडल द्वारा पर्चे व कार्ड बांटकर जनजागरूकता भी की गई।
नीलगाय रक्षा आंदोलन के प्रतिनिधियों ने राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से मुलाकात कर कानून निरस्त कराने हेतु हस्तक्षेप की मांग की।
महावीर जयंती पर निकाली गई झांकियों में भी अहिंसा का मार्मिक संदेश देते हुए नीलगायों की रक्षा की अपील की गई।
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