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    चार्जिंग स्टेशन, एडमिन बिल्डिंग का काम जोरों पर, अगस्त से होगा इलेक्ट्रिक बसों का संचालन-राकेश मसीह

    कोरबा कोरबा अर्बन ट्रांसपोर्ट पब्लिक सोसायटी के द्वारा वर्ष 2018 में अलग-अलग 8 मार्गों पर चलाई गई 48 सिटी बसों ने तीन वर्ष तक लाखों की संख्या में लोगों को किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई। शहरी और कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में यह सेवा विस्तारित रही। कोविड के बाद लगे प्रतिबंधों ने अन्य वाहनों की तरह सिटी बसों के पहिए थाम लिए, अब वे कबाड़ में बदल गई है। इधर ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिहाज से एक बार फिर इलेक्ट्रिक बसों को चलाने की योजना है। एक वर्ष पहले बनी योजना पर काम चल रहा है। संभावित है कि चार महीने बाद इसकी सेवाएं लोगों को मिल सकेंगीं।
            बीते वर्षों में सिटी बसों के संचालन के लिए जमनीपाली के प्रतीक्षा बस स्टैंड परिसर में टर्मिनल बनाया गया था। उसी स्थान पर इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन और एडमिनिस्ट्रेशन बिल्डिंग तैयार किया जा रहा है। कोरबा अर्बन ट्रांसपोर्ट पब्लिक सोसायटी के द्वारा इस काम को कराया जा रहा है।प्रशासन के नियंत्रण में यह सोसायटी अपना काम कर रही है। केंद्र सरकार ने बीते वर्ष इलेक्ट्रिक बसों की सेवा देने के अंतर्गत कोरबा को 40 ई-बसें स्वीकृत की। इनकी घोषणा के बाद आगे का काम प्रारंभ किया गया।
            सोसायटी के नोडल ऑफिसर राकेश मसीह ने बताया कि चार्जिंग स्टेशन के लिए 33 केवी की लाइन पृथक से खींची जा रही है। यहां से इलेक्ट्रिक बसों को चार्ज करने की व्यवस्था की जाएगी। सेवाओं का केंद्रीकरण इसी स्थान पर होगा। अन्य सभी अधोसंरचनाओं को बेहतर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। योजना के तहत जो शेड्यूल तय किया गया था उसके हिसाब से आगे बढ़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि सबकुछ ठीकठाक समय पर हो, यह कोशिश है। अगस्त 2026 से कोरबा क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रारंभ हो जाएगा। बताया गया कि इसी अवधि से प्रदेश में एक साथ यह सेवाएं शुरू होना है। उम्मीद जताई जा रही है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से कोरबा शहर उपनगरीय क्षेत्र और आसपास के बड़े हिस्से को सेवाओं का लाभ किफायती तौर पर प्राप्त हो सकेगा। वहीं इलेक्ट्रानिक दोपहिया को बढ़ावा देने के लिए कई स्थानों पर चार्जिंग प्वाइंट भी तैयार किए जा रहे हैं। ये विधिवत रूप से अगले कुछ दिनों में काम करेंगे।
            जानकारों का कहना है कि मध्य एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पेट्रो पदार्थों की उपलब्धता को लेकर आए दिन अलग-अलग खबरें आ रही है। ऐसी स्थिति में इसकी न्यूनतम खपत की जरूरत समझी जा रही है। ऐसे में ग्रीन एनर्जी सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें पर्यावरण को नुकसान जैसा कुछ है नहीं और कम लागत पर ज्यादा सेवाएं उपलब्ध कराने का रास्ता भी साफ होना है।

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