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    जिला कलेक्टर ने चिकित्सा विभाग बैठक में हीट वेव को लेकर दिए निर्देश

    कलेक्टर की आमजन को हीट वेव से बचाव के लिए सतर्क रहने की अपील, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर जोर

    खैरथल। जिला कलेक्टर अतुल प्रकाश की अध्यक्षता में शुक्रवार को चिकित्सा विभाग एवं आयुर्वेद विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। आगामी ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर ने आमजन से हीट वेव के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं एवं बीमार व्यक्तियों को अतिरिक्त सतर्कता रखने के निर्देश दिए।

    बैठक के दौरान जिला कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी अस्पतालों में लू-तापघात के मरीजों के लिए गाइडलाइन के अनुसार बेड आरक्षित रखे जाएं। साथ ही कूलर, शुद्ध पेयजल एवं आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। आपातकालीन किट में ओआरएस, ड्रिप सेट, फ्लूड एवं जरूरी दवाइयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    उन्होंने चिकित्सा विभाग एवं आयुर्वेद विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए कॉमन एनसीडी स्क्रीनिंग, लाडो योजना की प्रगति एवं जिले की एनक्यूएएस रैंकिंग की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    जिला कलेक्टर ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि हीट वेव के दौरान अनावश्यक रूप से धूप में बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो शरीर को पूरी तरह ढककर रखें और हल्के रंग के ढीले एवं सूती कपड़ों का उपयोग करें। उन्होंने बताया कि कुपोषित बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं एवं श्रमिक वर्ग लू-तापघात से जल्दी प्रभावित होते हैं, इसलिए इन्हें सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक धूप से बचना चाहिए।

    लू-तापघात से बचाव के लिए सावधानियां:
    अत्यधिक भीड़ और गर्म वातावरण से बचें तथा आवश्यक होने पर ही यात्रा करें। बिना भोजन किए बाहर न निकलें और पर्याप्त पानी पीकर ही घर से निकलें। सड़े-गले फल एवं बासी भोजन से परहेज करें। धूप में निकलते समय सिर, गर्दन एवं कान को ढककर रखें तथा छाता एवं चश्मे का उपयोग करें। गर्मी में नियमित रूप से नींबू पानी, नारियल पानी एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें। कार्यस्थलों पर श्रमिकों के लिए छाया एवं पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखें। कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक से बचें।

    लू-तापघात के लक्षण:
    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट ने बताया कि शरीर में पानी एवं लवण की कमी होने पर लू-तापघात होता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, अधिक प्यास लगना, थकान, जी मिचलाना, चक्कर आना, शरीर का तापमान बढ़ना, पसीना बंद होना, त्वचा का सूखना एवं बेहोशी जैसी स्थिति शामिल हैं।

    प्राथमिक उपचार के उपाय:
    लू-तापघात से प्रभावित व्यक्ति को तुरंत छायादार स्थान पर ले जाकर कपड़े ढीले कर आराम करवाएं और ठंडे पानी से शरीर को ठंडा करें। ओआरएस, नींबू पानी, नारियल पानी या आम का पना पिलाएं तथा जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं।

    बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट, सहायक निदेशक आयुर्वेद विभाग अजीत बाल्याण सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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