महाविद्यालय में सामाजिक न्याय के लिए फुले के विचारों पर छात्राओं को किया जागरूक
वजीरपुर , गंगापुरसिटी। राजकीय कन्या महाविद्यालय वजीरपुर में शुक्रवार को सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भाग लिया और महात्मा फुले के विचारों एवं जीवन संघर्ष से प्रेरणा ग्रहण की।
कार्यक्रम में नोडल अधिकारी एवं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. रमेश बैरवा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा फुले जातिमुक्त और शोषण मुक्त भारत के लिए आजीवन संघर्षरत रहे। उन्होंने बताया कि महात्मा ज्योतिराव फुले का जन्म वर्ष 1827 में पुणे में हुआ था और वे एक महान समाज सुधारक एवं गहन चिंतक थे।
डॉ. बैरवा ने कहा कि महात्मा फुले ने ‘गुलामगिरी’, ‘सत्यशोधक समाज’ और ‘किसान का कोड़ा’ जैसी महत्वपूर्ण रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों, भेदभाव और शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने छात्राओं को इन रचनाओं का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने यह भी बताया कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर महात्मा फुले को अपना वैचारिक गुरु मानते थे। फुले के विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक हैं और सामाजिक समानता की दिशा में मार्गदर्शक का कार्य करते हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि महात्मा फुले ने कार्ल मार्क्स और शहीद-ए-आजम भगत सिंह की तरह सामाजिक एवं आर्थिक शोषण के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने जाति एवं जेंडर आधारित भेदभाव का विरोध करते हुए समाज के शोषित, पीड़ित एवं मेहनतकश वर्ग के उत्थान के लिए कार्य किया।
महात्मा फुले ने शिक्षा के महत्व को समझाते हुए दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के लिए शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया और भारत का पहला महिला विद्यालय स्थापित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को एक अच्छे विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया।
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