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    पूजा में की ये बड़ी गलती, तो झेलना पड़ सकता है प्रभु का प्रकोप!

    सनातन धर्म में आंतरिक शुद्धिकरण और ईश्वर की आराधना के लिए विधि-विधान से पूजा-पाठ किया जाता है, ताकि ईश्वर प्रसन्न होकर हमारी मनोकामना पूरी कर दें और जीवन में सकारात्मक लेकर आए. लेकिन पूजा के दौरान आपका अनजाने में छोटी-छोटी गलतियां करना आपके लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है और यह खुशहाली नहीं, बल्कि दरिद्रता और नकारात्मकता लेकर आता है. देहरादून के ज्योतिषाचार्य योगेश कुकरेती ने बताया कि सही तरीके से पूजा करने से कितना लाभ होता है और अगर ऐसा न किया जाए, तो यह मनुष्य के जीवन पर कितना गलत प्रभाव डाल सकता है.

    पूजा के दौरान भूलकर ना करें ये गलतियां
    ज्योतिषाचार्य कुकरेती बताते हैं कि आपकी गलतियों से ईश्वर रुष्ठ हो सकते हैं. पूजा के दौरान आपको साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि ईश्वर की पूजा करने से पहले आप खुद को आंतरिक और बाहरी तौर पर पवित्र कर लें. स्नान करने के साथ ही मन से बुरे विचारों को दूर करें. उन्होंने कहा कि चमड़े के पर्स, बेल्ट आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए, बल्कि आप धोती पहनकर ही पूजा करें. अक्षत में टूटे चावलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, भगवान को भोग लगाने के बाद तुरंत उसे ग्रहण नहीं करना चाहिए. पूजा के समय अगरबत्ती का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें बांस होता है जिसे जलाना अशुभ माना जाता है.

    पूजा करते समय रखें यह ध्यान
    उन्होंने बताया कि पूजा के वक्त सही विधि और नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है. अगर हम सही तरीके से पूजा नहीं करते हैं, तो उसका कोई परिणाम हमें नहीं मिलता है. पूजा करते समय सबसे पहले हमें अपना मन और पूजा का स्थान साफ़ रखना चाहिए. जब भी पूजा करो, तो बिना स्नान करे हमें पूजा नहीं करनी चाहिए. भगवान को भी बिना स्नान किए स्पर्श नहीं करना चाहिए. सुबह की पूजा का सही समय 4 बजे से 11.30 बजे तक माना गया है. दिन में 12 बजे से 4 बजे तक पूजा न करें, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस समय भगवान विश्राम करते हैं. शाम को 5.30 बजे से 7.30 तक पूजा कर सकते हैं. पूजा में उपयोग होने वाले फूल, दीपक, मिठाई, दूध आदि सब कुछ शुद्ध और ताजा होना चाहिए

    जमीन पर रखकर ना जलाएं दीया
    पूजा में सबसे पहले श्री गणेश जी की पूजा करें. इनके बाद ही अन्य भगवानों का ध्यान करें, क्योंकि हमारे सनातन धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम देवता माना गया है. उन्होंने पूजा में कभी भी अगरबत्ती के न उपयोग करने की सलाह दी है, क्योंकि अंतिम संस्कार में ही प्रयोग होती है और इससे घर पर बुरा असर भी पड़ सकता है. कभी भी दीए को जमीन पर रखकर न जलाएं. आप दिए के नीचे हमेशा एक छोटी प्लेट या कोटरी रखें. पूजा में कभी भी भगवान शिव को और गणेश जी को तुलसी जी नहीं चढ़ाई जाती है.

    उन्होंने बताया कि भगवान शिव को भांग, धतूरा और बेलपत्र यह सब प्रिय है और मान्यता के अनुसार, तुलसी जी भगवान विष्णु की प्रिय हैं. इसलिए भगवान शिव जी को तुलसी जी नहीं चढ़ाई जाती है. पूजा में जो हम पुष्प चढ़ाते हैं, बाद में वह पुष्प जब सूख जाते हैं, तो उन्हें कूड़े में न फेंके, बल्कि किसी पौधे में डाल दें या फिर किसी पवित्र नदी में बहा दें. पूजा में दीया प्रज्वलित करते शुद्ध देसी घी या तिल के तेल का पारण किया जाता है, यह घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है.
    काले कपड़े धारण करने से बचें
    एक बात का विशेष ध्यान रखें कि जब भी दीपक प्रज्वलित करें, तो दीपक का मुंह हमेशा अपने बाएं हाथ की ओर ही रखें और भगवान को लगाए हुए भोग को तुरंत न हटाएं और ज़्यादा देर भी न रखें. 5 मिनट बाद भोग को उठा लें और प्रसाद के रूप में ग्रहण कर लें. पूजा सम्पन्न होने के बाद ही आरती करें और उसके बाद उस जगह पर भगवान का ध्यान करते हुए श्रद्धा से 3 परिक्रमा करें. कभी भी काले कपड़े पहनकर पूजा नहीं करनी चाहिए. मंदिर में कभी भी नीले काले और गहरे बैंगनी रंग के परदे नहीं लगाने चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इन पर्दों को लगाना अशुभ है.
    उन्होंने कहा कि पूजा एक धार्मिक परम्परा नहीं, बल्कि हमारे मन की श्रद्धा, भगवान के प्रति हमारा भाव है. हम जितने मन से, लगाव से पूजा करेंगे तो भगवान हमसे उतना ही प्रसन्न होंगे और उस पूजा से उतना ही अच्छा फल हमें प्राप्त होगा. पूजा करके हमारे मन को शांति मिलती है और साथ ही हमारे घर का वातावरण भी शांत हो जाता है और एक सकारात्मक ऊर्जा हमेशा रहती है.

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