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    Homeराज्यमध्यप्रदेशकागजों में हरियाली, जमीन पर सूखे पौधे

    कागजों में हरियाली, जमीन पर सूखे पौधे

    प्रोटोकॉल की आड़ में 'हरियाली का दिखावा': जबलपुर में सीएम के दौरे से पहले आनन-फानन में पौधारोपण, भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची के उठे सवाल

    जबलपुर|मुख्यमंत्री के नगर प्रवास की सुगबुगाहट होते ही नगर निगम ने बिलहरी से लेकर गौर एकता मार्केट तक के डिवाइडरों को हरा-भरा करने का मोर्चा संभाल लिया है। हालांकि, विभागीय सक्रियता की इस चमक के पीछे धांधली और सरकारी धन के दुरुपयोग की गंभीर आशंकाएं जताई जा रही हैं।

    भीषण गर्मी में 'डेथ वारंट' पर हस्ताक्षर?

    सबसे बड़ा सवाल पौधारोपण के समय को लेकर उठ रहा है। वर्तमान में पारा अपने उच्चतम स्तर पर है और भीषण लू चल रही है। जानकारों का कहना है कि:

    • गलत समय: पौधारोपण के लिए मानसून का समय सबसे अनुकूल होता है। इस झुलसाती गर्मी में नए पौधों को रोपना उन्हें सीधे मौत के मुंह में धकेलने जैसा है।

    • दिशानिर्देशों का अभाव: विभागीय सूत्रों के अनुसार, भोपाल मुख्यालय से इस मार्ग पर पौधारोपण के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुए हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर युद्ध स्तर पर कार्य कराया जा रहा है, जिसे केवल 'दिखावा' माना जा रहा है।

    टेंडरों को बांटकर चहेतों को 'उपकृत' करने का खेल

    प्रशासनिक गलियारों में इस चर्चा ने भी जोर पकड़ लिया है कि मुख्यमंत्री के दौरे को एक 'अवसर' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

    • टुकड़ों में काम: जटिल टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए कथित तौर पर बड़े प्रोजेक्ट्स को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर दिया गया है।

    • सीधा कार्यादेश: ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि चहेते ठेकेदारों को बिना किसी बड़ी प्रतिस्पर्धा के सीधे कार्यादेश जारी किए जा सकें। उद्यान विभाग के आला अधिकारी स्वयं इन फाइलों की 'कागजी खानापूर्ति' की निगरानी कर रहे हैं ताकि बजट को जल्द से जल्द खपाया जा सके।

    सरकारी खजाने पर बोझ और देखरेख की चिंता

    बिलहरी से गौर एकता मार्केट तक के इस सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री का दौरा किसी कारणवश टल जाता है, तो इन पौधों को पानी देने वाला भी कोई नहीं बचेगा। पानी की किल्लत और भीषण गर्मी के चलते ये पौधे हफ्ता भर भी जीवित नहीं रह पाएंगे। ऐसे में यह पूरा खर्च जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी साबित हो सकता है।

    अधिकारियों का दबाव और कर्मचारियों की बेबसी

    विभाग के भीतर भी इस निर्णय का विरोध हो रहा है। निचले स्तर के कर्मचारी दबी जुबान में कह रहे हैं कि प्रतिकूल मौसम में नर्सरी से पौधे निकालकर सड़कों पर लगाना केवल 'इमेज बिल्डिंग' का हिस्सा है। मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल का हवाला देकर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।

    वर्तमान में गौर नदी के किनारे प्रस्तावित गार्डन की जमीन की सफाई और अन्य निर्माण कार्यों को जिस तेजी से निपटाया जा रहा है, उससे साफ झलकता है कि विभाग का मुख्य लक्ष्य विकास नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के सामने अपनी सक्रियता की 'झूठी तस्वीर' पेश करना है।

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