भारत-चीन रक्षा मंत्रियों की बैठक में वार्ता के दौरान सुरक्षा, सहयोग और विश्वास बहाली पर चर्चा
बिश्केक। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान भारत और चीन के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसे दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
वार्ता के मुख्य बिंदु
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने एशिया क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया, वहीं विशेषज्ञों ने इसे रचनात्मक और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना है।
लद्दाख विवाद के संदर्भ में अहम
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में लद्दाख के एलएसी क्षेत्र में हुई झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव आ गया था। हालांकि, इसके बाद से सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत के जरिए स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिश्केक में हुई यह उच्चस्तरीय बैठक दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
दौरे के अन्य कार्यक्रम
बैठक से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक के विक्ट्री स्क्वायर पर पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके साथ ही वे किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात कर रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने SCO के अन्य सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
क्यों अहम है यह बैठक
SCO एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है, जहां भारत अपनी “जीरो टॉलरेंस ऑन टेरर” नीति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है। चीन के साथ इस स्तर की बातचीत यह संकेत देती है कि भारत विवादों को कूटनीतिक माध्यम से सुलझाने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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