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    सांवलिया सेठ मंदिर में अनोखे चढ़ावे, अफीम से चांदी के बंगले तक चौंकाने वाली भेंट

    चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में भक्त मन्नत पूरी होने पर चांदी का पेट्रोल पंप, अफीम के पौधे, कार और अन्य अनोखी वस्तुएं भेंट कर रहे हैं

    चित्तौड़गढ़। राजस्थान के सुप्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में इन दिनों भक्तों की अटूट श्रद्धा और उनके द्वारा अर्पित किए जाने वाले विचित्र उपहार कौतूहल का विषय बने हुए हैं। अपनी मन्नतें पूरी होने पर यहाँ श्रद्धालु न केवल नकद और जेवरात चढ़ा रहे हैं, बल्कि अपनी जीवनशैली और आजीविका से जुड़ी वस्तुओं को भी भगवान के चरणों में समर्पित कर रहे हैं। भक्तों का अटूट विश्वास है कि सांवलिया सेठ उनके हर दुख-सुख के साथी और उनके व्यापार में बराबर के हिस्सेदार हैं, यही कारण है कि यहाँ का चढ़ावा देश के अन्य मंदिरों से बिल्कुल भिन्न और विशेष नजर आता है।

    चांदी का पेट्रोल पंप और अफीम के पौधे: मन्नत पूरी होने पर भेंट

    इस मंदिर की सबसे निराली बात यहाँ चढ़ाई जाने वाली चांदी की कलाकृतियां हैं। भक्त अपनी मन्नत के अनुसार विशेष ऑर्डर देकर चांदी की ऐसी वस्तुएं बनवाते हैं, जो उनके व्यवसाय या इच्छा का प्रतीक होती हैं। स्थानीय स्वर्णकारों के पास इन दिनों चांदी की लहसुन, हरी मिर्च और अफीम के पौधों जैसे ऑर्डर की भरमार रहती है। चौंकाने वाली बात यह है कि भक्तों की मांग पर यहाँ चांदी का रावण और यहाँ तक कि चांदी का पूरा पेट्रोल पंप भी तैयार कर भगवान को भेंट किया जा चुका है। इसके अलावा कार, आलीशान कोठी और मोबाइल कवर जैसे आधुनिक मॉडलों को भी लोग अपनी सफलता का आभार जताने के लिए ठाकुर जी को अर्पित कर रहे हैं।

    दानपात्रों से निकलता करोड़ों का चढ़ावा और उमड़ता जनसैलाब

    सांवलिया सेठ के प्रति लोगों की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ हर महीने जब दानपात्र खोले जाते हैं, तो चढ़ावा करोड़ों रुपयों में निकलता है। मंदिर के खजाने में होने वाली इस भारी वृद्धि के पीछे भक्तों की वह धारणा है जिसमें वे भगवान को अपना ‘बिजनेस पार्टनर’ मानते हैं और मुनाफे का एक हिस्सा स्वेच्छा से मंदिर में दान करते हैं। विशेषकर अमावस्या और एकादशी के पावन मौकों पर यहाँ भक्तों का महाकुंभ उमड़ पड़ता है, जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध होकर अपने ‘सांवलिया सरकार’ के दर्शन करने पहुँचते हैं। आस्था और व्यापार के इस अनूठे संगम ने इस मंदिर को देशभर में एक विशिष्ट पहचान दिला दी है।

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