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    RBI Governor: इकोनॉमी मजबूत लेकिन कर्ज और महंगाई बढ़ने का खतरा

    RBI गवर्नर की चेतावनी: वैश्विक कर्ज और रक्षा खर्च बन सकते हैं चुनौती, पर भारत की नींव मजबूत

    एम्स्टर्डम। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू खपत और सरकारी निवेश के कारण भारत की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने बढ़ते रक्षा बजट और देशों पर बढ़ते कर्ज को लेकर दुनिया को आगाह भी किया है।

    भारत की मजबूती के पीछे के कारण

    गवर्नर के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था को दो मुख्य स्तंभों से सहारा मिल रहा है:

    • सार्वजनिक निवेश: सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर किए जा रहे खर्च (Capex) ने निजी निवेश को नई गति दी है।

    • घरेलू मांग: देश के भीतर वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती खपत ने उत्पादन क्षमता को विस्तार दिया है।

    • कॉरपोरेट सेहत: कंपनियों की बैलेंस शीट पहले से बेहतर हुई है और पूंजी बाजारों से फंड जुटाने की प्रक्रिया में तेजी आई है।


    गवर्नर मल्होत्रा ने किन खतरों की ओर किया इशारा?

    वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कुछ प्रमुख जोखिमों का जिक्र किया:

    1. राजकोषीय दबाव: रक्षा खर्च में हो रही बढ़ोतरी और वित्तीय विस्तार के कारण कई देशों की राजकोषीय स्थिति बिगड़ सकती है।

    2. ऊंचा मूल्यांकन: तकनीकी क्षेत्र सहित कुछ विशेष परिसंपत्तियों (Assets) की कीमतों का वास्तविकता से अधिक होना बाजार के लिए खतरा बन सकता है।

    3. महंगाई का चक्र: सप्लाई चेन में बाधा और ऊर्जा (ईंधन) की बढ़ती कीमतें 'सेकेंड-ऑर्डर महंगाई' को जन्म दे सकती हैं।


    समझिए क्या है 'सेकेंड-ऑर्डर महंगाई'?

    यह महंगाई का वह चक्र है जो एक क्षेत्र से शुरू होकर पूरी अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लेता है।

    • शुरुआत: मान लीजिए कच्चे तेल या कच्चे माल की कीमतें बढ़ती हैं।

    • असर: इससे परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है।

    • परिणाम: कंपनियां घाटे से बचने के लिए अपने उत्पादों के दाम बढ़ा देती हैं। इसके बाद कर्मचारी भी अपना घर चलाने के लिए ज्यादा वेतन की मांग करते हैं, जिससे लागत और बढ़ती है और महंगाई का एक कभी न खत्म होने वाला लूप बन जाता है।


    विकास दर का अनुमान

    आरबीआई गवर्नर ने भारत की विकास दर (GDP Growth) के आंकड़े भी साझा किए:

    • 2021-25: औसत वृद्धि दर 8.2% रही।

    • 2025-26: अनुमानित विकास दर 7.6%

    • 2026-27: अनुमानित विकास दर 6.9%

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