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    भोपाल मेट्रो पर नया विवाद: कब्रों के नीचे से गुजरने पर वक्फ बोर्ड की आपत्ति

    भोपाल: राजधानी की महत्वाकांक्षी मेट्रो रेल परियोजना इन दिनों विकास की पटरी से उतरकर कानूनी गलियारों में उलझती नजर आ रही है। शहर के ऐतिहासिक स्वरूप को आधुनिकता से जोड़ने की कोशिशों के बीच प्राचीन कब्रिस्तानों और वक्फ संपत्तियों के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। इस संवेदनशील मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है, जिसमें वक्फ बोर्ड की कमेटी ने मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण का दरवाजा खटखटाते हुए मेट्रो निर्माण कार्य पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाने की गुहार लगाई है।

    प्राचीन कब्रिस्तानों के अस्तित्व और धार्मिक मान्यताओं पर संकट

    मेट्रो के प्रस्तावित अंडरग्राउंड कॉरिडोर को लेकर सबसे बड़ा विरोध भोपाल टॉकीज और हमीदिया रोड स्थित ऐतिहासिक कब्रिस्तानों के नीचे से लाइन निकालने को लेकर हो रहा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मासूमा तकिया अम्मनशाह और मस्जिद नूरानी जैसे क्षेत्रों में स्थित ये कब्रिस्तान शहर के सबसे पुराने और बड़े कब्रिस्तान हैं, जहाँ हजारों रूहें सुपुर्द-ए-खाक हैं। कमेटी का आरोप है कि सुरंग निर्माण और मशीनों के कंपन से इन कब्रों की संरचना को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है, जिससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत होंगी बल्कि यह एक बड़ा सामाजिक मुद्दा बन सकता है।

    वक्फ भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण के गंभीर आरोप

    विवाद का दूसरा मोर्चा नारियलखेड़ा स्थित वक्फ निशात अफजा की भूमि को लेकर खुला है, जहाँ मेट्रो कंपनी पर बिना अनुमति निर्माण शुरू करने के आरोप लगे हैं। याचिका के अनुसार, वक्फ रजिस्टर और राजपत्र में दर्ज खसरा नंबर 88 की करीब 11.93 हेक्टेयर भूमि में से 1.40 एकड़ हिस्से पर कंपनी ने भारी मशीनरी उतार दी है। यहाँ बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर पिलर खड़े किए जा रहे हैं और भारी मात्रा में निर्माण सामग्री जमा कर दी गई है, जिसे कमेटी ने सीधे तौर पर वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करार दिया है।

    कानूनी दलीलें और सुरक्षा रिपोर्ट पर उठते सवाल

    वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दलील दी है कि वक्फ अधिनियम के तहत किसी भी संपत्ति के उपयोग से पहले बोर्ड की अनुमति और विधिक नोटिस अनिवार्य है, जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि मेट्रो अधिकारियों ने अब तक इस क्षेत्र का कोई तकनीकी सुरक्षा आकलन या विस्तृत नक्शा सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे स्थानीय लोगों और प्रबंधन में संशय की स्थिति बनी हुई है। वक्फ अधिकरण से मांग की गई है कि जब तक भूमि की मूल स्थिति और सुरक्षा सुनिश्चित न हो जाए, तब तक विवादित स्थलों पर निर्माण कार्य को पूरी तरह वर्जित किया जाए।

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