चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुराने द्रविड़ वर्चस्व को तोड़ते हुए एक नया इतिहास रच दिया गया है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में अपनी धमक दिखाई है। अब कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाते हुए विजय की पार्टी को सरकार बनाने के लिए बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया है। इस गठबंधन के साथ ही राज्य की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया है और तमिलनाडु में पहली बार एक ऐसी सरकार बनने जा रही है जो पारंपरिक द्रविड़ दलों (DMK और AIADMK) से अलग है।
कांग्रेस का समर्थन और गठबंधन की आधिकारिक प्रक्रिया
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस इकाई ने वर्चुअल बैठक के जरिए टीवीके को समर्थन देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। आज यानी 6 मई को कांग्रेस द्वारा समर्थन का आधिकारिक पत्र जारी किया जाएगा, जिसके बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय से मुलाकात कर गठबंधन की औपचारिकताओं को अंतिम रूप देंगे। इस रणनीतिक फैसले का मुख्य उद्देश्य राज्य में एक धर्मनिरपेक्ष सरकार की स्थापना करना है, ताकि भाजपा या उसके सहयोगियों को सत्ता की दौड़ से बाहर रखा जा सके।
बहुमत का जादुई आंकड़ा और विजय की चुनावी सफलता
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों की आवश्यकता है, जबकि टीवीके के पास 108 सीटें हैं। बहुमत के आंकड़े से मात्र 10 सीट दूर खड़ी टीवीके को अब कांग्रेस का साथ मिलते ही सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल हासिल हो गया है। युवाओं और शहरी मतदाताओं के जबरदस्त रुझान के कारण विजय की पार्टी ने राज्य के पारंपरिक राजनीतिक ढर्रे को चुनौती दी है। अपनी मजबूत स्थिति को देखते हुए विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है और बहुमत साबित करने के लिए दो सप्ताह का समय माँगा है।
धर्मनिरपेक्ष राजनीति और नई सरकार का विजन
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया है कि यह जनादेश संविधान की रक्षा और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखने के लिए है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट दिया है और कांग्रेस जनता की इसी भावना का सम्मान करते हुए टीवीके के साथ हाथ मिला रही है। विजय और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई सीधी बातचीत ने इस गठबंधन की नींव रखी है, जिसे राज्य में एक नए राजनीतिक युग के उदय के रूप में देखा जा रहा है। यह नई शक्ति न केवल वर्तमान सरकार का चेहरा बदलेगी, बल्कि भविष्य की क्षेत्रीय राजनीति को भी नया आकार देगी।


