शिलॉन्ग: इंदौर के प्रतिष्ठित व्यवसायी राजा रघुवंशी की सनसनीखेज हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की न्यायिक राहत अब खतरे में पड़ती नजर आ रही है। स्थानीय सत्र न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के बाद मेघालय सरकार ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। सरकार की इस कानूनी सक्रियता के तहत मंगलवार को सोनम को आधिकारिक नोटिस जारी किया गया है, जिसके बाद उनके फिर से सलाखों के पीछे जाने की संभावना बढ़ गई है।
निचली अदालत के फैसले पर सरकार की गंभीर आपत्ति
शिलॉन्ग की ईस्ट खासी हिल्स सत्र अदालत ने गत 27 अप्रैल को सोनम रघुवंशी को रिहा करने का आदेश दिया था, जिसमें धाराओं के तकनीकी आधार को जमानत का मुख्य कारण बताया गया था। हालांकि, राज्य सरकार ने मेघालय हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में दलील दी है कि सत्र न्यायालय ने जमानत देते समय इस जघन्य अपराध की गंभीरता और समाज पर पड़ने वाले इसके न्यायिक प्रभावों की पूरी तरह अनदेखी की है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तकनीकी आधार पर दी गई राहत न्याय की मूल भावना के विपरीत है।
12 मई को होगा भविष्य का फैसला और परिजनों का आक्रोश
मेघालय उच्च न्यायालय अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर 12 मई को सुनवाई करने वाला है, जो सोनम की आजादी का अंतिम फैसला तय करेगा। इधर, मृतक राजा रघुवंशी के परिजनों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है; परिवार ने स्थानीय पुलिस की जांच और अदालती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजा की मां ने सार्वजनिक रूप से अपना दुख और आक्रोश जाहिर करते हुए सोनम की रिहाई को न्याय के साथ खिलवाड़ बताया है, जिससे इस कानूनी लड़ाई में भावनात्मक और सामाजिक दबाव भी बढ़ गया है।
जांच और धाराओं के फेर में फंसा कानूनी पेच
सोनम को मिली शुरुआती राहत के पीछे पुलिस द्वारा दर्ज की गई भारतीय न्याय संहिता (BANS) की धाराओं के तकनीकी पक्ष को जिम्मेदार माना गया था। बचाव पक्ष का तर्क था कि मामले में गलत कानूनी धाराओं का प्रयोग किया गया है, जिसे आधार मानकर सत्र न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी। अब हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि क्या राज्य सरकार के तर्क सोनम की जमानत को रद्द करने के लिए पर्याप्त हैं या उन्हें फिलहाल जेल से बाहर रहने की अनुमति बनी रहेगी।


