मुंगेर। जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड स्थित दूधपनियां गांव में फ्लोराइडयुक्त पानी का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुद्ध पेयजल और सही इलाज की कमी के कारण यह गांव धीरे-धीरे 'अपंगों के गांव' में तब्दील होता जा रहा है। हाल ही में फ्लोराइड की वजह से दिव्यांगता झेल रही 29 वर्षीय ललिता बेसरा की मौत ने प्रशासन के तमाम दावों और वादों की पोल खोलकर रख दी है।
एक ही परिवार में दो मौतें: उजड़ गया घर
दूधपनियां गांव में स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज दो महीने के भीतर एक ही परिवार के दो सदस्यों की जान चली गई। दो माह पहले विनोद बेसरा की मौत हुई थी और अब उनकी बेटी ललिता ने भी दम तोड़ दिया। यह परिवार वर्षों से फ्लोराइडयुक्त पानी के कारण शारीरिक अक्षमता का शिकार था।
डीएम के दौरे के बाद भी नहीं बदला मंजर
7 जनवरी को जिलाधिकारी निखिल धनराज निपनिकर खुद इस गांव पहुंचे थे। उन्होंने पीड़ितों को विशेष नीति के तहत सहायता देने और गांव में कैंप लगाकर स्वास्थ्य जांच कराने का भरोसा दिलाया था। हालांकि, डीएम के निर्देश पर कुछ चापाकल तो बदले गए और पेयजल की व्यवस्था हुई, लेकिन जो लोग पहले से इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, उन्हें उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी सक्रियता केवल दौरे तक ही सीमित रही।
ग्रामीणों में आक्रोश: "सिर्फ आश्वासनों से नहीं भरेंगे घाव"
ललिता की मौत के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त गुस्सा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। आज भी गांव के कई घरों में लोग खाट पर पड़े मौत से जूझ रहे हैं, लेकिन उनके इलाज के लिए कोई ठोस योजना धरातल पर नहीं दिख रही है।
निजी स्तर पर मदद: दुख की इस घड़ी में पूर्व मुखिया प्रतिनिधि संजय मंडल ने मृतका के परिवार से मुलाकात की और अपने निजी कोष से 2000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।


