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    मुरैना में बारूद के धमाकों से दहशत, अवैध खनन से घरों में पड़ रही दरारें

    मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की बानमौर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम मलखानपुरा में अवैध रूप से चल रहे उत्खनन और भारी ब्लास्टिंग ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। खनन माफियाओं द्वारा किए जा रहे तेज धमाकों से पूरा इलाका दहल रहा है और ग्रामीण हर वक्त किसी बड़ी अनहोनी के डर से खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि रसूखदारों द्वारा बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर न सिर्फ पत्थरों का दोहन किया जा रहा है, बल्कि वहां धड़ल्ले से अवैध कॉलोनी का निर्माण भी कराया जा रहा है।

    बिना अनुमति के सरकारी जमीन पर कब्जा और रास्ते बंद

    स्थानीय निवासियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गांव की सर्वे क्रमांक 10, 11, 23, 128, 129 और 170 हेक्टेयर भूमि पर बिना किसी वैध लीज या प्रशासनिक स्वीकृति के धड़ल्ले से भारी मशीनें चलाकर अवैध खनन किया जा रहा है। इसके साथ ही, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग से बिना कोई ले-आउट पास कराए इस बेशकीमती जमीन पर अवैध कॉलोनी का जाल बिछाया जा रहा है। माफियाओं की मनमानी यहीं नहीं रुकी; उन्होंने गांव के पारंपरिक रास्तों पर कब्जा कर उन्हें पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है और क्षेत्र के एक प्राचीन मंदिर को भी वहां से हटाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में गहरा धार्मिक और सामाजिक आक्रोश भड़क उठा है।

    धमाकों से दरके मकान, कभी भी हो सकती है बड़ी तबाही

    मलखानपुरा के ग्रामीणों का कहना है कि पत्थरों को तोड़ने के लिए खदानों में रोजाना किए जाने वाले हैवी ब्लास्टिंग के कारण पूरा गांव भूकंप की तरह कांप जाता है। इन शक्तिशाली धमाकों की वजह से गांव के कई गरीब परिवारों के पक्के मकानों में चौड़ी दरारें आ गई हैं, और कुछ घरों की छतें तथा दीवारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर ढहने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। पीड़ितों ने अंदेशा जताया है कि यदि इन खतरनाक धमाकों को तुरंत नहीं रोका गया, तो कभी भी कोई जर्जर मकान मलबे में तब्दील हो सकता है और कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।

    इंडस्ट्री संचालक पर संरक्षण के आरोप, प्रशासन से गुहार

    प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया है कि पास ही में संचालित एक बड़ी इंडस्ट्री के संचालक द्वारा इन तमाम अवैध गतिविधियों और खनन माफियाओं को पूरा बैकअप और संरक्षण दिया जा रहा है। ग्रामीणों का दर्द है कि वे इस गुंडागर्दी के खिलाफ स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं, लेकिन बार-बार की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक मौके पर आकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उद्वेलित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस अवैध खनन और जानलेवा ब्लास्टिंग पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए, रास्ते बहाल किए जाएं और जिन गरीब परिवारों के मकानों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें उचित मुआवजा व सुरक्षा प्रदान की जाए।

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