More
    Homeराजस्थानजयपुर3 साल में पहली बार अच्छा पेपर, 650 अंकों की उम्मीद पर...

    3 साल में पहली बार अच्छा पेपर, 650 अंकों की उम्मीद पर हुआ आत्महत्या

    सीकर। राजस्थान के शिक्षा हब सीकर में नीट परीक्षा रद्द होने से उपजे भारी मानसिक दबाव के चलते एक तेईस वर्षीय होनहार छात्र द्वारा मौत को गले लगाने का बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। डॉक्टर बनने का ख्वाब संजोए प्रदीप माहिच नामक इस युवा ने पिछले तीन सालों से दिन-रात एक कर रखी थी, और इस बार की परीक्षा में उसे छह सौ पचास से अधिक अंक आने का पूरा भरोसा था। घर में सफेद कोट पहनने के अरमान सज चुके थे, लेकिन परीक्षा निरस्त होने की खबर ने उसे गहरे अवसाद में धकेल दिया। शुक्रवार की दोपहर सीकर के पिपराली रोड स्थित जलधारी नगर में इस इकलौते भाई ने फांसी का फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली, जिससे खुशियों की उम्मीद वाले घर में अब सिर्फ कोहराम और सन्नाटा पसरा हुआ है।


    तिनके-तिनके से बुना था डॉक्टर बनने का सपना और बिखर गया आशियाना

    मूल रूप से झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कनिका की ढाणी का निवासी प्रदीप तीन बहनों के बीच अकेला भाई और पूरे परिवार की आंखों का तारा था। उसके पिता राजेश कुमार मेघवाल गांव में खेती-बाड़ी करके और अपनी जरूरतों को मारकर बेटे की महंगी पढ़ाई का खर्च उठा रहे थे, ताकि उनका बेटा एक दिन डॉक्टर बनकर परिवार का नाम रोशन कर सके। प्रदीप अपनी दो बहनों बबीता और निशा के साथ सीकर में एक किराए के मकान में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था, और उसकी इस कामयाबी पर पूरे कुनबे का भविष्य टिका हुआ था, लेकिन एक झटके में व्यवस्था की खामी ने पूरे परिवार के आशियाने को उजाड़ कर रख दिया।

    बहन ने कैंची से काटा फंदा और भाई को बचाने की वो बेबस चीखें

    शुक्रवार की दोपहर यह खौफनाक घटना उस वक्त हुई जब छोटी बहन निशा अपनी कोचिंग गई हुई थी और बड़ी बहन बबीता नहाने के लिए गई थी। प्रदीप ने बेहद मायूसी के आलम में बाथरूम का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया ताकि कोई उसे रोक न सके, और कमरे में जाकर लोहे के एंगल के सहारे फंदा बनाकर उस पर झूल गया। बबीता जब किसी तरह दरवाजा खोलकर बाहर आई, तो भाई को इस हालत में देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने आनन-फानन में कैंची से फंदे को काटा और भाई को नीचे उतारा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मकान मालिक की सूचना पर पहुंची पुलिस जब उसे कल्याण अस्पताल लेकर गई, तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    परीक्षा के बाद कहा था इस बार पक्का होगा चयन और पंद्रह मई तक का ही दिया था किराया

    पड़ोसियों और ग्रामीणों के अनुसार, प्रदीप परीक्षा देने के बाद बेहद खुश था और उसने गांव जाकर अपने माता-पिता और दोस्तों से पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा था कि इस बार उसका चयन बिल्कुल पक्का है। वह अपनी सफलता को लेकर इस कदर आश्वस्त था कि उसने मकान मालिक को कमरा खाली करने की बात कहते हुए केवल पंद्रह मई तक का ही किराया चुकाया था और कहा था कि सिलेक्शन के बाद वह अपना सारा सामान समेटकर घर लौट जाएगा। मगर जैसे ही परीक्षा रद्द होने की आधिकारिक घोषणा हुई, उसके हौसले पूरी तरह टूट गए और वह गुमसुम रहने लगा, जिसके बाद शुक्रवार सुबह पिता से दूध-छाछ भेजने को लेकर हुई सामान्य बातचीत ही उसकी आखिरी बातचीत साबित हुई।

    पेपर लीक माफिया के खिलाफ पिता का फूटा गुस्सा और मोर्चरी पर पसरा मातम

    अस्पताल के शवगृह के बाहर अपने लाडले के शव को लेने आए पिता राजेश कुमार की पथराई आंखें इस कड़वी हकीकत को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। रोते-बिलखते पिता ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे ने खुदकुशी नहीं की है, बल्कि चंद स्वार्थी तत्वों और पेपर लीक करने वाले माफियाओं ने मिलकर उनके होनहार बेटे की हत्या की है। प्रदीप की मौत की खबर जैसे ही उसके पैतृक गांव कनिका की ढाणी पहुंची, पूरे इलाके में चूल्हा तक नहीं जला और हर ग्रामीण की आंखें नम थीं। बाल अधिकार और शिक्षा विशेषज्ञों ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए छात्रों से अपील की है कि वे परीक्षाओं को जीवन का अंतिम सच न मानें और मुश्किल वक्त में अपने परिवार के प्यार को याद रखें।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here