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    अमेरिका से वापस आ रही दुर्लभ मूर्ति, रायपुर म्यूजियम चोरी मामले में बड़ा अपडेट

    रायपुर | छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव से जुड़ी एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। महासमुंद जिले के ऐतिहासिक स्थल सिरपुर से प्राप्त और रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से करीब 43 साल पहले चोरी हुई भगवान अवलोकितेश्वर की अत्यंत दुर्लभ कांस्य प्रतिमा जल्द ही अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ लौट सकती है। अमेरिका में बरामद की गई इस बहुमूल्य और प्राचीन मूर्ति को वापस भारत लाने का रास्ता साफ हो चुका है, जिसके बाद अब राज्य सरकार और पुरातत्व विभाग इसे वापस छत्तीसगढ़ लाने की तैयारियों में पूरी मुस्तैदी से जुट गया है।

    अमेरिका से भारत सौंपी गई मूर्ति, वापसी के लिए पत्राचार शुरू

    लंबे इंतजार के बाद अमेरिका में जब्त की गई इस ऐतिहासिक धरोहर को भारत सरकार को सौंप दिया गया है। छत्तीसगढ़ के पुरातत्व एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार के साथ इस विषय पर औपचारिक लिखापढ़ी और पत्राचार की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। जैसे ही केंद्र की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश और अंतिम अनुमति प्राप्त होगी, राज्य सरकार के विशेषज्ञों और अधिकारियों की एक विशेष टीम इस दुर्लभ प्रतिमा को ससम्मान वापस लाने के लिए रवाना होगी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में 19 करोड़ रुपये है अनुमानित कीमत

    चोरी की गई इन ऐतिहासिक कलाकृतियों में सबसे बेशकीमती और अनमोल भगवान बुद्ध के ही एक स्वरूप 'अवलोकितेश्वर' की यह कांस्य प्रतिमा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार और पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, इस इकलौती प्रतिमा की अनुमानित कीमत लगभग 20 लाख अमेरिकी डॉलर आंकी गई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 19 करोड़ रुपये के बराबर है। इस मूर्ति की बनावट और इस पर की गई नक्काशी तत्कालीन धातु शिल्प की उन्नत कला को दर्शाती है।

    सिरपुर के ऐतिहासिक लक्ष्मण मंदिर परिसर से मिला था यह खजाना

    पुरातत्वविदों के अनुसार, यह बेशकीमती कांस्य प्रतिमा छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक नगरी सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर परिसर के समीप खुदाई और खोज के दौरान प्राप्त हुई थी। सिरपुर को बौद्ध और हिंदू संस्कृति का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। संग्रहालय से चोरी होने के बाद से ही पुरातत्व प्रेमी और इतिहासकार इसकी वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे, जो अब 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार पूरी होने जा रही है।

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