More
    Homeदेशडिफेंस सेक्टर में भारत की बड़ी चाल, ब्रह्मोस मिसाइल डील से ड्रैगन...

    डिफेंस सेक्टर में भारत की बड़ी चाल, ब्रह्मोस मिसाइल डील से ड्रैगन परेशान

    हनोई/नई दिल्ली: भारत और वियतनाम के बीच सामरिक संबंधों के इतिहास में आज एक नया और बेहद महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। फिलीपींस के बाद वियतनाम दूसरा ऐसा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश बनने की कगार पर है, जिसने भारत की अचूक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' को खरीदने में अपनी गहरी और आधिकारिक दिलचस्पी दिखाई है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दो दिवसीय हनोई दौरे के दौरान इस बहुप्रतीक्षित ब्रह्मोस मिसाइल रक्षा सौदे पर अंतिम दौर की उच्च स्तरीय चर्चा होने जा रही है। इस यात्रा की शुरुआत से पहले रक्षा मंत्री ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वे दोनों एशियाई देशों के साथ रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने और समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस यात्रा पर रवाना हो रहे हैं, जिसका सीधा असर हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की शांति और स्थिरता पर पड़ेगा।

    रक्षा मंत्री का पांच दिवसीय विदेश दौरा, व्यापक रणनीतिक साझेदारी के पूरे हुए 10 साल

    भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा सोमवार (18 मई, 2026) को जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कुल पांच दिनों के अति-महत्वपूर्ण विदेशी दौरे पर हैं, जिसके तहत वे 18-19 मई को वियतनाम में रहेंगे और इसके तुरंत बाद 19 से 21 मई तक दक्षिण कोरिया की यात्रा पर रहेंगे। वियतनाम का यह दौरा ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर हो रहा है जब दोनों देशों के बीच आपसी 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (कॉम्प्रेहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप) के सफल 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वेन जियांग से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को लेकर विशेष डेलिगेशन लेवल वार्ता करेंगे। इसके साथ ही वे वियतनाम के राष्ट्रपिता और पूर्व राष्ट्रपति हो चिन मिन्ह के ऐतिहासिक स्मारक पर जाकर उन्हें भारत की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे।

    भारत ने दिया 500 मिलियन डॉलर का क्रेडिट लाइन, सुखोई और किलो क्लास सबमरीन का MRO ऑफर

    इस महत्वपूर्ण दौरे की मजबूत नींव इसी महीने की शुरुआत में तब रखी गई थी, जब वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत के आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली आए थे। उस ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान भारत सरकार ने वियतनाम की नौसैनिक ताकत को बढ़ाने के लिए 500 मिलियन डॉलर (करीब 5,000 करोड़ रुपये) की एक बड़ी 'क्रेडिट लाइन' (वित्तीय सहायता) देने की घोषणा की थी। इस भारी-भरकम राशि की मदद से वियतनाम के लिए भारत में 3 से 4 आधुनिक 'ऑफशोर पैट्रोल वेसल' (OPV समुद्री युद्धपोत) और एक दर्जन से अधिक 'हाई-स्पीड पैट्रोल बोट्स' का निर्माण किया जाना तय हुआ है। इसके अतिरिक्त, भारत की ही तरह रूसी हथियारों का इस्तेमाल करने वाले वियतनाम को भारतीय रक्षा उद्योग ने उनके 'सुखोई लड़ाकू विमानों' और 'किलो क्लास पनडुब्बियों' के रख-रखाव, मरम्मत और ओवरहॉलिंग (MRO) की अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करने का भी एक आकर्षक और रणनीतिक प्रस्ताव दिया है।

    दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की दादागिरी का जवाब बनेगी ब्रह्मोस, फिलीपींस की तर्ज पर तैयारी

    वियतनामी राष्ट्रपति के दिल्ली दौरे के वक्त ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने संकेत दे दिए थे कि दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की खरीद को लेकर बातचीत काफी उन्नत चरण में पहुंच चुकी है। भारत ने साल 2022 में फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर (लगभग 3,500 करोड़ रुपये) का पहला सफल ब्रह्मोस निर्यात सौदा किया था, जिसकी पहली खेप हाल ही में फिलीपींस को सौंपी गई है। फिलीपींस ने इन घातक 'एंटी-शिप' मिसाइलों को मुख्य रूप से दक्षिण चीन सागर (साउथ चाइना सी) में चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधियों और तनातनी का मुकाबला करने के लिए अपनी तटीय सीमाओं पर तैनात किया है। ठीक उसी तरह, वियतनाम का भी दक्षिण चीन सागर की संप्रभुता और समुद्री द्वीपों को लेकर बीजिंग के साथ पुराना और बेहद संवेदनशील विवाद रहा है; यही कारण है कि अपनी समुद्री संप्रभुता की रक्षा और चीनी नौसेना के दबाव को संतुलित करने के लिए वियतनाम भारत की इस अचूक मिसाइल प्रणाली को अपने रक्षा बेड़े में अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहता है।

    दक्षिण कोरिया में 'इंडो-कोरिया बिजनेस राउंडटेबल' और भारतीय वीरों के वॉर मेमोरियल का उद्घाटन

    वियतनाम में अपनी रणनीतिक वार्ताओं को पूरा करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सीधे दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के लिए उड़ान भरेंगे। वहाँ वे अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष अह्न ग्यू बैक के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों पर सघन चर्चा करेंगे। इसके अलावा, वे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सैन्य-औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए 'इंडो-कोरिया बिजनेस राउंडटेबल' की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे। सियोल दौरे का सबसे भावुक और ऐतिहासिक क्षण वह होगा, जब रक्षा मंत्री कोरियाई युद्ध (1950-53) के दौरान अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन के तहत वहां वीरगति को प्राप्त हुए वीर भारतीय सैनिकों की पावन स्मृति में नवनिर्मित एक भव्य 'वॉर मेमोरियल' (युद्ध स्मारक) का आधिकारिक उद्घाटन कर देश की ओर से कृतज्ञता व्यक्त करेंगे।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here