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    घाटी में नशे का जाल: जम्मू-कश्मीर की 13% आबादी ड्रग्स की गिरफ्त में

    श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में पैर पसारते ड्रग्स के अवैध कारोबार को नेस्तनाबूद करने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। घाटी में आतंकवाद के साथ-साथ अब नशीले पदार्थों का नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद और नार्को-तस्करी का यह गठजोड़ क्षेत्र की शांति को भंग करने की एक गंभीर साजिश है।

    इस खतरे से निपटने के लिए सरकार ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए पहली बार वित्तीय और प्रशासनिक प्रहार किया है। अब ड्रग्स तस्करी में संलिप्त पाए जाने वाले अपराधियों के आधार कार्ड [redacted], पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, हथियार और ट्रेड लाइसेंस जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ तुरंत निरस्त किए जा रहे हैं।

    कड़े प्रशासनिक कदम और गिरफ्तारियां

    नशे के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए प्रशासन ने राज्यभर में व्यापक धरपकड़ शुरू की है:

    • चिन्हित हॉटस्पॉट: सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर ऐसे 165 इलाकों (हॉटस्पॉट) की पहचान की है, जहां नशे का धंधा सबसे ज्यादा सक्रिय है।

    • FIR और गिरफ्तारियां: एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत अब तक 704 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 830 से अधिक तस्करों और पेडलर्स को सलाखों के पीछे भेजा गया है।

    • लाइसेंस और वाहनों पर गाज: इस कार्रवाई के तहत 300 ड्राइविंग लाइसेंस और 130 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए जा चुके हैं। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाले 110 मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और दो को पूरी तरह सील कर दिया गया है।

    13% आबादी पर मंडरा रहा है खतरा

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर की करीब 1.3 करोड़ की आबादी में से लगभग 13.5 लाख लोग किसी न किसी रूप में नशे की लत का शिकार हैं। यह संख्या कुल जनसंख्या का 13 प्रतिशत से भी अधिक है। साल 2022 में यह आंकड़ा करीब 6 लाख था, जो महज कुछ वर्षों में दोगुने से ज्यादा हो चुका है।

    पंजाब से जुड़े हैं तार, बदल रही है युवाओं की तकदीर

    नशे के दलदल से बाहर निकल चुके स्थानीय युवाओं और दक्षिण कश्मीर के निवासियों का कहना है कि इसके पीछे एक सुनियोजित और संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसके तार पंजाब के बड़े ड्रग तस्करों से जुड़े हैं। सीमावर्ती रास्तों का फायदा उठाकर हेरोइन और चरस जैसी खतरनाक दवाएं युवाओं तक पहुंचाई जा रही हैं।

    स्थानीय लोगों ने चिंता जताते हुए कहा कि जो बच्चे कभी डॉक्टर, इंजीनियर या वकील बनने का सपना देखते थे, वे अब स्कूली दिनों में सिगरेट से शुरुआत करके धीरे-धीरे कड़े नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इस लत को पूरा करने के लिए युवा अपने ही घरों में चोरियां करने को मजबूर हैं।

    100 दिन का विशेष अभियान

    इस सामाजिक और सुरक्षा संकट से उबरने के लिए प्रशासन ने 100 दिनों का एक विशेष नशा-विरोधी अभियान चलाया है। राहत की बात यह है कि इस मुहिम को जनता का भारी समर्थन मिल रहा है और अब तक एक करोड़ से ज्यादा लोग इस जागरूकता अभियान से जुड़ चुके हैं। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि आने वाले दिनों में ड्रग सिंडिकेट की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।

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