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    Homeस्वास्थ्यगर्मियों में तापमान का अचानक बदलाव क्यों है नुकसानदायक? जानिए पूरी जानकारी

    गर्मियों में तापमान का अचानक बदलाव क्यों है नुकसानदायक? जानिए पूरी जानकारी

    कड़कड़ाती धूप और गर्मी के दिनों में भी बार-बार सर्दी, खांसी और गले में जकड़न होना कई लोगों को हैरत में डाल देता है। सामान्यतः लोग इसे सिर्फ बदलते मौसम का असर या मामूली कमजोरी समझकर टाल देते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली इस तकलीफ के पीछे कुछ खास वजहें होती हैं।

    चिकित्सकीय भाषा में गर्मी के मौसम में अचानक होने वाली इस सर्दी-जुकाम की स्थिति को “कोल्ड शॉक” (Cold Shock) कहा जाता है। यह स्थिति सीधे तौर पर हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को प्रभावित करती है। यदि समय रहते इन आदतों को न सुधारा जाए, तो यह समस्या हफ्तों तक आपको परेशान कर सकती है। आइए जानते हैं कि गर्मियों में होने वाले इस 'कोल्ड शॉक' के मुख्य कारण क्या हैं और हम इससे कैसे बच सकते हैं।

    1. अचानक तापमान का बदलना (थर्मल शॉक)

    तेज धूप और भीषण गर्मी से झुलसते हुए सीधे एयर कंडीशनर (AC) वाले ठंडे कमरे में प्रवेश करना हमारे शरीर को एक बड़ा झटका देता है। तापमान में आने वाला यह अचानक उतार-चढ़ाव शरीर की इम्युनिटी को तुरंत कमजोर कर देता है। यही वजह है कि अचानक धूप से छांव या ठंडक में आने पर गला बैठ जाता है, नाक बहने लगती है और सिर में तेज दर्द शुरू हो जाता है।

    • बचाव का तरीका: बाहर से लौटकर आने के तुरंत बाद AC चालू न करें और न ही उसके ठीक सामने बैठें। शरीर को 5 से 10 मिनट तक कमरे के सामान्य तापमान में ढलने का समय दें। इसके अलावा, तुरंत एकदम ठंडा पानी पीने की गलती बिल्कुल न करें।

    2. एयर कंडीशनर (AC) का बहुत ज्यादा उपयोग

    गर्मियों के दिनों में घंटों AC में वक्त बिताना भले ही सुकून देता हो, लेकिन सेहत के लिहाज से यह नुकसानदेह भी हो सकता है। लगातार AC की सूखी और ठंडी हवा के संपर्क में रहने से हमारे गले और सांस नली की प्राकृतिक नमी खत्म होने लगती है। इसके कारण गला सूखना, लगातार खराश रहना और नाक ब्लॉक होने जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। कई लोगों को सुबह सोकर उठते ही भारी सिर और जुकाम की शिकायत इसीलिए होती है।

    • बचाव का तरीका: AC का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच ही सेट करके रखें। सीधे एसी की हवा के नीचे बैठने से बचें। बीच-बीच में थोड़ी देर के लिए ताजी हवा में आएं और दिनभर पर्याप्त पानी पीकर खुद को हाइड्रेटेड रखें।

    3. अत्यधिक ठंडी चीजों का खान-पान

    गर्मी से राहत पाने के लिए लोग धड़ल्ले से आइसक्रीम, बर्फ डली हुई कोल्ड ड्रिंक्स और फ्रिज का चिल्ड पानी पीते हैं। यह अत्यधिक ठंडा तापमान गले की झिल्ली (म्यूकस मेम्ब्रेन) को सिकोड़ देता है, जिससे वहां इन्फेक्शन या संक्रमण होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ठंडी चीजों का यह लगातार प्रहार हमारी इम्युनिटी को भी सुस्त कर देता है, जिससे वायरल बीमारियां हमें जल्दी जकड़ लेती हैं।

    • बचाव का तरीका: ठंडी चीजों और आइसक्रीम का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। फ्रिज से तुरंत निकाली गई बोतलों का पानी सीधे न पिएं। मटके का पानी या सामान्य तापमान का पानी पीना गर्मियों में शरीर के लिए सबसे सुरक्षित और गुणकारी होता है।

    4. धूल-मिट्टी और हवा की एलर्जी

    गर्मियों के मौसम में चलने वाली तेज हवाओं और धूलभरी आंधी के कारण वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। हवा में तैरते ये बारीक धूल के कण जब सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं, तो एलर्जी रिएक्शन शुरू हो जाता है। इसके कारण लगातार छींकें आना, नाक बहना और गले में कांटे जैसी चुभन होना आम बात है। जिन लोगों को अस्थमा या डस्ट एलर्जी की पुरानी समस्या है, उनके लिए यह मौसम और भी संवेदनशील हो जाता है।

    • बचाव का तरीका: जब भी घर से बाहर निकलें, मुंह और नाक को मास्क या साफ सूती कपड़े से अच्छी तरह ढक कर ही निकलें। बाहर से घर वापस आने पर हाथ-मुंह धोएं और हल्के गुनगुने पानी से गरारे करें। घर के भीतर भी नियमित साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

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