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    भोजशाला परिसर में गूंजा शंखनाद, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच प्रशासन सतर्क

    धार: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर आज, 22 मई 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद, कड़े सुरक्षा पहरे के बीच आज सुबह से ही हिंदू समाज द्वारा परिसर में पूजन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दावों के मुताबिक, यह करीब 721 वर्षों के बाद पहला ऐसा ऐतिहासिक मौका है जब शुक्रवार के दिन हिंदू समाज को यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने का अधिकार मिला है। इसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है; परिसर को सुंदर वंदनवारों से सजाया गया है और लोग शंख बजाकर इस दिन को एक उत्सव की तरह मना रहे हैं।

    मां वाग्देवी की पूजा और श्रद्धालुओं का भारी उत्साह

    सुबह तय समय पर हिंदू श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचे और मंत्रोच्चार के साथ अपनी धार्मिक प्रक्रिया शुरू की। श्रद्धालुओं ने सबसे पहले मां वाग्देवी को चुनरी ओढ़ाकर पुष्प अर्पित किए और गर्भगृह को भव्य रूप से सजाया। इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए भोजशाला आंदोलन से लंबे समय से जुड़े 92 वर्षीय बुजुर्ग विमल गोधा भी मां वाग्देवी के दर्शन के लिए पहुंचे। स्थानीय निवासी विद्या सोनी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे सुबह अपने सारे काम छोड़कर यहां आई हैं और यह उनके लिए सत्य की जीत जैसा है। दोपहर 12 बजे के बाद से ही यहां दर्शनार्थियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है और जल्द ही एक विशाल महाआरती का आयोजन होने जा रहा है।

    सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य सेवाएं भी अलर्ट मोड पर

    महाआरती में जुटने वाली भारी भीड़ और संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को भी अलर्ट मोड पर रख दिया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला अस्पताल में 20 अतिरिक्त बेड आरक्षित किए गए हैं और आईसीयू (ICU) व सामान्य वार्डों को पूरी तरह तैयार रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैनात की गई पांच एंबुलेंस में से चार को विशेष रूप से भोजशाला परिसर के बाहर खड़ा किया गया है। इसके अलावा, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की एक 12 सदस्यीय मेडिकल टीम देर शाम तक कार्यक्रम स्थल पर तैनात रहेगी।

    सुप्रीम कोर्ट से 'स्टे' की उम्मीद में मुस्लिम समाज

    दूसरी तरफ, कमाल मौला मस्जिद के सदर अब्दुल समद ने इस नए घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए कहा कि पिछले 700 वर्षों से चली आ रही जुमे की नमाज की परंपरा के अचानक रुक जाने से मुस्लिम समाज में दुख का माहौल जरूर है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उनकी यह लड़ाई पूरी तरह से संवैधानिक और कानूनी दायरे में है। सदर और शहर काजी ने उम्मीद जताई है कि शुक्रवार दोपहर या शाम तक उन्हें सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर राहत या 'स्टे' मिल सकता है। उन्होंने अपने समाज के लोगों से अपील की है कि जब तक शीर्ष अदालत से कोई नया आदेश नहीं आ जाता, तब तक सभी लोग प्रशासनिक गाइडलाइन का पालन करें और शहर में अमन-चैन व भाईचारा बनाए रखें।

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