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    सीएम सम्राट चौधरी के गृह क्षेत्र में जल संकट, आबादी प्यासी और नदी का पानी पीने को मजबूर

    मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड से पेयजल संकट की एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है। सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल भीम बांध के सोनरवा गांव में पिछले एक महीने से सरकारी नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है। चिलचिलाती धूप और उमस भरी भीषण गर्मी के बीच बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे गया है। शुद्ध पेयजल न मिलने के कारण ग्रामीण भीम बांध नदी का दूषित पानी लाकर अपनी और अपने परिवार की प्यास बुझाने को विवश हैं। प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने गुरुवार को जलापूर्ति ठप होने के विरोध में पानी की टंकी के आगे खड़े होकर जमकर प्रदर्शन किया।

    300 की आबादी पानी के लिए बेहाल, शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं

    यह पूरा मामला गंगटा पंचायत के अंतर्गत आने वाले वार्ड संख्या 12 (सोनरवा गांव) का है, जहां लगभग 300 लोग निवास करते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक महीने से नलों में पानी नहीं आ रहा है, जिससे पूरे गांव में हाहाकार मचा हुआ है। घरेलू कामकाज और पीने के पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को कड़ी धूप में नदी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर संबंधित विभाग को कई बार लिखित और मौखिक तौर पर अवगत कराया गया, लेकिन लंबे समय तक अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

    मुख्यमंत्री के गृह विधानसभा का हवाला देकर वार्ड सदस्य ने उठाए सवाल

    पेयजल संकट को लेकर राजनीति भी गरमाने लगी है। स्थानीय वार्ड सदस्य संतन कुमार सिंह ने इस बदहाली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि इस समस्या की आधिकारिक शिकायत जिला परामर्शदात्री समिति (डीसीसी) में भी दर्ज कराई गई थी, पर नतीजा सिफर रहा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह क्षेत्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का गृह विधानसभा इलाका है; जब मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र के गांवों में विकास योजनाओं का यह हाल है और लोग नदी का पानी पीने को मजबूर हैं, तो सूबे के बाकी सुदूर इलाकों की स्थिति क्या होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

    नदी का पानी ढोने को मजबूर हैं महिलाएं, टंकी के सामने किया प्रदर्शन

    पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीण सुमित कोड़ा, राशि कोड़ा, जितिया देवी, किरण देवी, सुमन देवी और माला देवी सहित दर्जनों महिलाओं ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि सिर पर बर्तनों में नदी का पानी ढोना उनकी नियति बन चुका है। नदी का पानी साफ न होने के कारण बच्चों के बीमार होने का खतरा भी लगातार बना रहता है। अपनी मांग को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए गुरुवार को गांव के पुरुषों और महिलाओं ने पानी की टंकी के पास एकत्रित होकर विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और जल्द से जल्द जलापूर्ति चालू करने की चेतावनी दी।

    रांची से बुलाए जा रहे हैं मैकेनिक, विभाग ने दो दिन में सुधार का दिया भरोसा

    ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और विरोध प्रदर्शन के बाद लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के अधिकारी हरकत में आए हैं। इस संबंध में विभाग के एसडीओ तपेश्वर साफी ने तकनीकी खराबी की बात स्वीकार करते हुए बताया कि सोनरवा गांव की नल-जल योजना सोलर पैनल सिस्टम पर आधारित है, जिसमें कुछ बड़ी तकनीकी दिक्कत आ गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस खराबी को दुरुस्त करने के लिए झारखंड की राजधानी रांची से विशेष कारीगर (मिस्त्री) बुलाए गए हैं। आगामी एक से दो दिनों के भीतर तकनीकी खामी को दूर कर गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति दोबारा सुचारू कर दी जाएगी।

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