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    अलवर में ‘विचार एवं मुस्कान’ समारोह, बिज्जू को श्रद्धांजलि

    सुनील बिज्जू के विचारों पर चर्चा, लोकतांत्रिक व्यक्तित्व को किया याद

    अलवर। हिंदी दैनिक ‘अरुणप्रभा’ की ओर से वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक सुनील बिज्जू की पहली पुण्यतिथि पर प्रकाशित पुस्तक ‘विचार एवं मुस्कान’ का लोकार्पण समारोह पुलिस अन्वेषण भवन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

    समारोह का उद्घाटन वरिष्ठ सर्जन एवं आरएसएस के विभाग संघ चालक डॉ. के.के. गुप्ता ने किया। उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में सुनील बिज्जू के योगदान को याद करते हुए उनके लेखन कौशल की सराहना की। डॉ. सृष्टि माथुर ने अपने पिता से मिले संस्कार, प्रेरणा और मार्गदर्शन को साझा करते हुए उन्हें प्रगतिशील विचारों का धनी बताया।

    बिज्जू के विचारों पर चर्चा, लोकतांत्रिक सोच को सराहा

    मुख्य वक्ता डॉ. जीवन सिंह मानवी ने कहा कि सुनील बिज्जू के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी धरोहर उनके विचार हैं, जो इस पुस्तक के माध्यम से जीवित रहेंगे। उन्होंने कहा कि बिज्जू पूरी तरह लोकतांत्रिक सोच वाले व्यक्ति थे और उनके परिवार में पितृसत्ता जैसी संकीर्ण सोच का स्थान नहीं था।

    डॉ. मानवी ने कहा कि बिज्जू का व्यापक अध्ययन और समृद्ध दृष्टिकोण उन्हें विशिष्ट बनाता था। उन्होंने पुस्तक में शामिल संस्मरणों का उल्लेख करते हुए बिज्जू के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।

    पत्रकारिता के सफर को याद कर भावुक हुए सुशील झालानी

    ‘अरुणप्रभा’ के प्रधान संपादक सुशील झालानी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि सुनील बिज्जू से उनका रूहानी रिश्ता था। करीब चार दशक तक साथ काम करते हुए दोनों के बीच गहरा विश्वास और आत्मीय संबंध बना रहा। उन्होंने कहा कि बिज्जू के लिए पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं बल्कि एक मिशन था।

    अपने संबोधन के दौरान बिज्जू को याद करते हुए सुशील झालानी भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गईं। वहीं कार्यक्रम में मौजूद बिज्जू की बहन बीना माथुर और पत्नी रेनू माथुर भी कई बार भावुक दिखाई दीं।

    साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने साझा किए अनुभव

    इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यशपाल त्रिपाठी, राजस्व अपील अधिकारी संजू शर्मा और इतिहास विशेषज्ञ हरिशंकर गोयल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने सुनील बिज्जू को बहुआयामी लेखक, विनोदप्रिय और संवेदनशील पत्रकार बताया।

    पुस्तक की संपादक बीना माथुर ने अपने अनुज को अध्ययनशील, तर्कशील और विविध विषयों पर गहरी पकड़ रखने वाला लेखक बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुबंध राय ने किया।

    समारोह में बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार, शिक्षक, अधिवक्ता और बिज्जू परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

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