बीकानेर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार रात एक विशेष विमान के जरिए करीब 10:30 बजे बीकानेर के नाल एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे। हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने उनकी अगवानी की। इसके बाद गृह मंत्री सीधे बीएसएफ (BSF) मुख्यालय के लिए रवाना हो गए। इस पूरे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूनतम प्रोटोकॉल और सादगी के संदेश का असर साफ देखने को मिला, क्योंकि गृह मंत्री के काफिले में गाड़ियों की कोई लंबी-चौड़ी वीवीआईपी कतार नजर नहीं आई। आज मंगलवार को अमित शाह भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों के विकास के लिए 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2' की शुरुआत करेंगे।
सांचू पोस्ट का दौरा और जवानों से संवाद
गृह मंत्री अमित शाह बीकानेर से सांचू बॉर्डर पोस्ट के लिए प्रस्थान करेंगे। यहाँ वे सीमा पर मुस्तैद देश के वीर जवानों के साथ सीधा संवाद करेंगे। इसके साथ ही, वे वॉच टावर पर चढ़कर इंटरनेशनल बॉर्डर (भारत-पाकिस्तान सीमा) की सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा भी लेंगे। आपको बता दें कि इस चेकपोस्ट से अंतरराष्ट्रीय सीमा की दूरी महज 5 किलोमीटर है।
मुख्यमंत्री और दिग्गज नेताओं ने किया भव्य स्वागत
गृह मंत्री के बीकानेर आगमन पर नाल एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने के लिए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रभारी मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा और वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ सहित कई सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा राज्य की मुख्य सचिव, डीजीपी, संभागीय आयुक्त, आईजी, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित शीर्ष प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने भी प्रोटोकॉल के तहत गृह मंत्री का स्वागत किया।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2: सड़कों और 4G नेटवर्क से लैस होंगे सीमावर्ती गांव
इस महत्वपूर्ण योजना के दूसरे चरण में राजस्थान के चार सीमावर्ती जिलों— बीकानेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर और बाड़मेर के कुल 184 गांवों को शामिल किया गया है। केंद्र सरकार की इस पहल के तहत इन सुदूर ग्रामीण इलाकों में पक्की सड़कों का जाल बिछाया जाएगा। इसके साथ ही 4G टेलीकॉम नेटवर्क, बेहतर टेलीविजन कनेक्टिविटी और चौबीसों घंटे बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित कर बॉर्डर के गांवों को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
ऐतिहासिक सांचू बॉर्डर की शौर्यगाथा
रणनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सांचू सीमा चौकी बेहद खास स्थान रखती है। साल 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों के दौरान यह क्षेत्र सेना की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। 1965 की जंग में भारतीय रणबांकुरों ने अदम्य साहस दिखाते हुए इस चौकी को दुश्मनों के कब्जे से आजाद कराया था। यहाँ स्थापित किया गया युद्ध संग्रहालय आज भी भारतीय सेना की वीरता की कहानियों को बयां करता है और यहाँ आने वाले पर्यटकों में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाता है।


