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    गिरिबाला की जमानत रद्द होगी या बरकरार, ट्विशा केस में आज होगी सुनवाई

    जबलपुर/भोपाल: ट्विशा शर्मा मौत मामले में आज (बुधवार) जबलपुर हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग पर होगी। मध्य प्रदेश सरकार और ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने इस जमानत का कड़ा विरोध किया है। इससे पहले हुई सुनवाई में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया था कि गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं।

    डिजिटल सबूतों और 46 कॉल्स पर टिकी जांच

    इस केस की जांच अब पूरी तरह डिजिटल सबूतों के इर्द-गिर्द घूम रही है। पुलिस ने भोपाल कोर्ट को सूचित किया है कि घटना से जुड़े मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल (CDR) और टावर लोकेशन को सुरक्षित रखने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को पत्र भेज दिए गए हैं। ट्विशा के परिवार का आरोप है कि मौत के बाद सास गिरिबाला सिंह ने 46 लोगों को फोन किए थे, जिनमें कुछ न्यायिक अधिकारी और जांच एजेंसियों से जुड़े लोग भी शामिल हैं।

    सीबीआई का कड़ा रुख और अधूरी केस डायरी

    मामले को हाथ में लेते ही केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सीबीआई की टीम ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के घर पहुंचकर उनसे पूछताछ की और बयान दर्ज किए। इसके अलावा, सीबीआई अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात की और एसआईटी (SIT) से केस डायरी मांगी। शुरुआती जांच में केस डायरी अधूरी मिलने पर सीबीआई ने नाराजगी जताई, जिसके बाद एसआईटी ने देर रात जरूरी जानकारियां जोड़कर पूरी डायरी सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने गिरिबाला और उनके बेटे समर्थ के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस भी दर्ज किया है।

    पति समर्थ से तीखे सवाल: रिश्ते में तनाव की बात कबूली

    पुलिस और जांच एजेंसियों की पूछताछ में ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने माना कि उनके वैवाहिक संबंध तनावपूर्ण थे और दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे, लेकिन उसने किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा से इनकार किया है। समर्थ के मुताबिक, मार्च में ट्विशा के भाई की शादी के बाद से दोनों के बीच दूरियां और तनाव काफी बढ़ गया था।

    गर्भावस्था और मानसिक बीमारी 'बाइपोलर डिसऑर्डर' का दावा

    जांच में सबसे संवेदनशील मोड़ ट्विशा की गर्भावस्था, गर्भपात और उनकी मानसिक स्थिति को लेकर आया है। समर्थ ने दावा किया है कि वह और उनकी मां बच्चा चाहते थे, लेकिन गर्भ ठहरने के बाद से ही ट्विशा मानसिक तनाव में रहने लगी थीं और उन्हें 'बाइपोलर डिसऑर्डर' था। समर्थ के मुताबिक, डॉक्टर की सलाह पर ही उन्हें तनाव कम करने और नींद की दवाइयां दी जा रही थीं।

    मायके पक्ष के गंभीर आरोप

    दूसरी तरफ, ट्विशा के परिवार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। उनके वॉट्सऐप चैट से संकेत मिले हैं कि समर्थ ने ट्विशा की गर्भावस्था और बच्चे के पितृत्व (paternity) पर गंभीर सवाल उठाए थे। परिवार का आरोप है कि इसी विवाद के बाद ट्विशा का जबरन मानसिक इलाज शुरू कराया गया, जिससे उनका करीब 15 किलो वजन कम हो गया था। अब सीबीआई इस बात की गहराई से जांच करेगी कि क्या यह इलाज वाकई जरूरी था, क्या इसमें ट्विशा की सहमति थी और उनके परिवार को इस इलाज से अनजान क्यों रखा गया।

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