इन दिनों नौतपा का प्रचंड रूप आम जनजीवन और लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। मैदानी इलाकों में पारा लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर रहा है। हालांकि, बीते गुरुवार को दिल्ली और नोएडा के कुछ हिस्सों में हुई हल्की बूंदाबांदी से चिलचिलाती धूप से आंशिक राहत जरूर मिली है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 2 जून तक नौतपा का यह जानलेवा असर और हीटवेव का खतरा यूं ही बरकरार रहेगा।
अस्पतालों की ओपीडी फुल; बुजुर्ग, बच्चे और बीमार सबसे ज्यादा प्रभावित
राजधानी दिल्ली के विभिन्न बड़े अस्पतालों से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, ओपीडी और इमरजेंसी वार्डों में तेज बुखार, ब्लड प्रेशर लो होने और हीट स्ट्रोक (लू लगना) के शिकार मरीजों की तादाद में अचानक भारी इजाफा हुआ है। डॉक्टरों के अनुसार, इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा पहले से ही डायबिटीज और हाई बीपी जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को हो रहा है। अत्यधिक तापमान के कारण मानव शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम (पसीना आने की प्रक्रिया) काम करना बंद कर देता है, जिससे आंतरिक तापमान बढ़ने से शरीर के मुख्य अंग प्रभावित होने लगते हैं।
उमस (ह्यूमिडिटी) ने बढ़ाई दोहरी मुसीबत, अंदरूनी अंगों को खतरा
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. प्रसून चटर्जी ने बताया कि कई बार थर्मामीटर पर तापमान भले ही 35 या 40 डिग्री दिख रहा हो, लेकिन हवा में मौजूद भारी उमस के कारण असल अहसास (फील्स लाइक) 50 डिग्री सेल्सियस जैसा होता है। जलवायु परिवर्तन के कारण अब रातें भी बेहद गर्म होने लगी हैं, जिससे शरीर को संभलने या अपनी गर्मी बाहर निकालने का अवसर नहीं मिल पाता।
डॉ. चटर्जी के मुताबिक, बुजुर्गों में पसीना कम आने की वजह से डिहाइड्रेशन का खतरा जानलेवा स्तर तक पहुंच जाता है। पानी की भारी कमी का सीधा असर गुर्दों पर पड़ता है, यही वजह है कि अस्पतालों में अचानक 'किडनी फेलियर' के मामले तेजी से बढ़े हैं। इससे बचाव के लिए उन्होंने थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, ओआरएस और रसीले फलों का सेवन करने की सलाह दी है।
पेट की बीमारियां और थकान के लक्षण; इमरजेंसी में पहुंच रहे लोग
वहीं, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. सुदीप खन्ना ने सचेत करते हुए कहा कि चिलचिलाती धूप में लंबे समय तक रहने वाले लोग गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं। अस्पतालों में अत्यधिक थकान, चक्कर आना, उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बेहोशी जैसे लक्षणों के साथ लोग पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों ने हिदायत दी है कि दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बीच बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। बाहर जाते समय हमेशा सिर को ढककर रखें, छाते का प्रयोग करें और अपने पास नमक-चीनी का घोल या नींबू पानी जरूर रखें। अगर कोई व्यक्ति भ्रम की स्थिति में हो या अचेत होने लगे, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाएं, क्योंकि यह हीट स्ट्रोक का आपातकालीन लक्षण हो सकता है।
क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी? स्वास्थ्य विशेषज्ञों की गाइडलाइन:
हल्का और सुपाच्य भोजन: इस मौसम में ज्यादा तेल, मसाले और भारी खानपान से बचें, क्योंकि यह शरीर के भीतर गर्मी को बढ़ाता है।
इनका करें सेवन: तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, दही और छाछ को अपनी डाइट में अनिवार्य रूप से शामिल करें। ये चीजें शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखती हैं।
इनसे बचें: चाय, कॉफी (कैफीन) और शराब का सेवन बेहद सीमित कर दें, क्योंकि ये पेय पदार्थ शरीर को अंदर से सुखाते हैं और डिहाइड्रेशन को बढ़ावा देते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा के इस दौर में थोड़ी सी सजगता, सही खानपान और पर्याप्त लिक्विड डाइट अपनाकर गर्मी के इन जानलेवा खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रहा जा सकता है।


