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    पेट दर्द को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, महिला का मामला बना चेतावनी

    क्या आप भी भोजन करने के बाद अक्सर पेट में जलन, भारीपन या बदहजमी की शिकायत से परेशान रहते हैं? अगर ऐसा है, तो इसे केवल मामूली गैस या खान-पान की गड़बड़ी मानकर छोड़ देना सेहत पर भारी पड़ सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि मानव शरीर कई बार गंभीर और जानलेवा बीमारियों के संकेत बहुत ही साधारण लक्षणों के माध्यम से देता है, जिन्हें लोग रोजमर्रा की आम समस्या समझकर टालने की भूल कर बैठते हैं।

    अग्न्याशय का कैंसर (पैंक्रियाटिक कैंसर) भी एक ऐसी ही खामोश और खतरनाक बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षण पेट दर्द, सीने में जलन (हार्टबर्न) और पाचन तंत्र की आम दिक्कतों जैसे ही होते हैं। वक्त रहते इन संकेतों को पहचानना और सही चिकित्सकीय परामर्श लेना न केवल बीमारी को बढ़ने से रोकता है, बल्कि मरीज के पूरी तरह ठीक होने की उम्मीदों को भी कई गुना बढ़ा देता है।

    हाल ही में सामने आए एक दुखद मामले में एक महिला पेट की लगातार बनी रहने वाली तकलीफों को सामान्य अपच समझकर लंबे समय तक अनदेखा करती रही। उन्हें इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि जिसे वह मामूली दर्द समझ रही थीं, वह असल में पैंक्रियाटिक कैंसर का अलार्म था। आखिरकार सही समय पर इलाज न मिल पाने के कारण इस जानलेवा बीमारी ने उनकी जान ले ली।

    कैंसर से उबरने के बाद दूसरी लापरवाही पड़ी भारी

    यूके की स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, 57 वर्षीय लूसी ड्राइवर नाम की महिला लंबे समय से पेट से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित थीं। लूसी को साल 2005 में ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) हुआ था, जिसके बाद उनकी सर्जरी और कीमोथेरेपी की गई थी। एक साल के भीतर वे पूरी तरह स्वस्थ हो गईं और सामान्य जीवन जीने लगीं। हालांकि, मई 2022 से उन्हें अचानक पेट में तेज दर्द रहने लगा।

    कैंसर से एक बार पूरी तरह ठीक हो जाने के बाद अक्सर लोग मान लेते हैं कि वे अब पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिससे वे शरीर में उठने वाले दूसरे दर्दनाक लक्षणों पर ध्यान नहीं देते। लूसी ने भी इस नए दर्द को पैंक्रियाटाइटिस (अग्न्याशय की सामान्य सूजन) समझ लिया, जबकि असल में वे पैंक्रियाटिक कैंसर की चपेट में आ चुकी थीं। समय पर सही डायग्नोसिस न होने से उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    मसालेदार भोजन पचाने में होती थी मुश्किल

    मरीज के परिजनों के मुताबिक, स्तन कैंसर से रिकवर होने के बाद भी लूसी को हमेशा सीने के ऊपरी हिस्से में एसिडिटी और भारीपन महसूस होता था। अंतिम दिनों में उनकी स्थिति ऐसी हो गई थी कि वे थोड़ा भी मसालेदार या गरिष्ठ भोजन पचा नहीं पाती थीं। जब यह समस्या लगातार बढ़ने लगी, तब डॉक्टरों ने उनकी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट देखने के बाद उन्हें तुरंत इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने की सलाह दी। परिजनों को लगा था कि यह कोई साधारण संक्रमण होगा जिसका इलाज आसानी से हो जाएगा, लेकिन अगली ही सुबह डॉक्टरों ने खुलासा किया कि लूसी पैंक्रियाटिक कैंसर के दूसरे चरण (स्टेज-2) में पहुंच चुकी हैं।

    कितना घातक है पैंक्रियाटिक कैंसर?

    वैश्विक स्तर पर मौत का छठा सबसे बड़ा कारण पैंक्रियाटिक कैंसर दुनिया भर में पाया जाने वाला 12वां सबसे आम कैंसर है। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, हर साल इसके 5.10 लाख से अधिक नए मरीज सामने आते हैं और करीब 4.67 लाख लोग इसके कारण अपनी जान गंवा देते हैं। अपने बेहद आक्रामक स्वभाव और काफी देर से पकड़ में आने के कारण यह दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का छठा सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।

    यह कैंसर पेट के निचले हिस्से के ठीक पीछे स्थित अंग पैंक्रियास (अग्न्याशय) की कोशिकाओं से शुरू होता है। यह अंग हमारे शरीर में भोजन पचाने वाले जरूरी एंजाइम्स और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाले इंसुलिन जैसे हार्मोन्स बनाने का काम करता है।

    शुरुआती दौर में कैसे करें इसकी पहचान?

    इस बीमारी की सबसे चुनौतीपूर्ण बात यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण न के बराबर या बहुत ही सामान्य होते हैं। इसके स्पष्ट संकेत तब तक खुलकर सामने नहीं आते, जब तक कि कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैलना शुरू न कर दे। यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण लगातार महसूस हो रहे हों और सामान्य दवाओं से ठीक न हो रहे हों, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए:

    • पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार रहने वाला ऐसा दर्द, जो धीरे-धीरे पीठ या पसलियों की तरफ फैलता हो।

    • बिना किसी ठोस कारण के अचानक भूख कम हो जाना और तेजी से वजन गिरना।

    • आंखों और त्वचा पर बार-बार पीलिया (जौंडिस) के लक्षण दिखाई देना।

    • मल के रंग का अत्यधिक हल्का (मिट्टी जैसा) हो जाना और यूरिन का रंग गहरा आना।

    • त्वचा पर लगातार और बिना वजह तेज खुजली की समस्या होना।

    • हाथ या पैरों में अचानक सूजन और दर्द होना, जो नसों में खून के थक्के (ब्लड क्लॉट) बनने का संकेत हो सकता है।

    कैंसर के इलाज में समय ही सबसे बड़ा रक्षक है। लक्षणों के प्रति सजग रहकर और सही समय पर स्क्रीनिंग कराकर इस गंभीर बीमारी को मात दी जा सकती है।

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