मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिला शिक्षा विभाग की एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय की 'ओल्ड परीक्षा शाखा' में रखा वर्ष 1980 से 2000 तक का (लगभग 20 वर्षों का) बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रिकॉर्ड दीमक और नमी की भेंट चढ़ चुका है। इस लापरवाही के कारण कक्षा 5वीं और मिडिल (कक्षा 8वीं) के हजारों पूर्व विद्यार्थियों से जुड़े दस्तावेज, प्रमाण पत्र और सत्यापन (वेरिफिकेशन) संबंधी मूल अभिलेख पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।
रखरखाव में कमी: मिट्टी के ढेर में तब्दील हुईं फाइलें
मिली जानकारी के अनुसार, रिकॉर्ड शाखा में रखी इन अमूल्य फाइलों का लंबे समय से कोई उचित रखरखाव नहीं किया जा रहा था। देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे दीमक ने पूरे सरकारी दस्तावेजों को चाट लिया। वर्तमान में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि कई महत्वपूर्ण फाइलें पूरी तरह सड़कर खराब हो चुकी हैं। इसका सीधा असर उन हजारों लोगों पर पड़ेगा जो इस दौर में पढ़े हैं; भविष्य में उन्हें नई अंकसूची (मार्कशीट), डुप्लिकेट प्रमाण पत्र या नौकरी के समय शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन के लिए भारी प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनियों को किया नजरअंदाज: कर्मचारी
ओल्ड रिकॉर्ड शाखा में तैनात कर्मचारियों ने विभाग के बड़े अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि:
"भवन की स्थिति बेहद जर्जर है और यहां नमी व दीमक का प्रकोप लगातार बढ़ रहा था। इस रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और इसके संरक्षण को लेकर हमने कई बार लिखित में वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजे और गुहार लगाई, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।"
इसके साथ ही कर्मचारियों ने कार्यालय भवन की खस्ताहाल स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई है और आशंका व्यक्त की है कि यदि जल्द ही इस जर्जर बिल्डिंग की मरम्मत नहीं कराई गई या नया भवन नहीं मिला, तो यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
DEO ने मानी गलती, पूर्व अधिकारियों पर फोड़ा ठीकरा
इस बड़ी लापरवाही और प्रशासनिक नाकामी पर मुरैना के वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बी.एस. इंडोलिया ने अपना पक्ष रखते हुए स्वीकार किया कि ओल्ड परीक्षा शाखा में रखा करीब दो दशकों का पुराना रिकॉर्ड दीमक और नमी के कारण नष्ट हो चुका है। हालांकि, उन्होंने इसका ठीकरा पूर्ववर्ती कप्तानों पर फोड़ते हुए कहा कि पूर्व में पदस्थ रहे अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड के संरक्षण और कीटनाशक दवाओं के छिड़काव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने आगे बताया कि अब एक नए और सुरक्षित भवन के लिए प्रस्ताव तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेजा गया है ताकि बचे हुए और भविष्य के महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जा सके।
भविष्य अधर में, जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की मांग
इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड के नष्ट होने की खबर के बाद से स्थानीय नागरिकों और छात्र संगठनों में भारी आक्रोश है। सरकारी रिकॉर्ड के इस तरह नष्ट होने से उन हजारों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है जो अब देश-विदेश में सरकारी या निजी नौकरियों में कार्यरत हैं और जिन्हें कभी भी दस्तावेज संबंधी कार्यों के लिए इसकी जरूरत पड़ सकती है। स्थानीय प्रबुद्धजनों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और सरकारी संपत्ति व रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचाने वाले दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।


