आचार्य ज्ञानभूषण महाराज का अपना घर शालीमार जैन मंदिर में प्रवचन, धर्म और तपस्या का मार्ग अपनाने का संदेश
अलवर। दिगम्बर जैन संत आचार्य ज्ञानभूषण महाराज ससंघ मंगलवार को चिकानी से विहार करते हुए अपना घर शालीमार स्थित श्री दिगम्बर जैन वासुपूज्य मंदिर पधारे, जहां श्रद्धालुओं ने उनकी भव्य अगवानी की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आचार्य ज्ञानभूषण महाराज ससंघ को बैण्ड-बाजों के साथ भव्य जुलूस के रूप में मंदिर लाया गया। श्रद्धालु हाथों में धर्म ध्वज लिए जयकारों के साथ जिनेन्द्र भक्ति करते हुए चल रहे थे। मंदिर पहुंचने पर आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। इसके पश्चात उन्होंने वासुपूज्य भगवान के दर्शन कर मंगल प्रवचन प्रदान किए।
अपने प्रवचन में आचार्य ज्ञानभूषण महाराज ने कहा कि यदि जीवन में वास्तविक खुशहाली और आत्मिक शांति प्राप्त करनी है तो धर्म के मार्ग को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी की निन्दा करने अथवा अपनी प्रशंसा सुनने से जीवन का कल्याण नहीं हो सकता। व्यक्ति को सदैव इन दोनों भावों से दूर रहकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
आचार्य श्री ने कहा कि निन्दा और प्रशंसा दोनों ही मनुष्य को उसके वास्तविक लक्ष्य से भटका सकती हैं। मोक्ष प्राप्ति का मार्ग तप, संयम और साधना से होकर गुजरता है। जितना अधिक व्यक्ति तपस्या और धर्म का मार्ग अपनाएगा, उतना ही वह मोक्ष मार्ग के निकट पहुंचेगा।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को सदाचार, संयम और आत्मचिंतन का संदेश देते हुए कहा कि धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में अच्छे विचारों और श्रेष्ठ आचरण को अपनाना भी धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रवचन के अंत में आचार्य ज्ञानभूषण महाराज ससंघ ने सभी श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। इस दौरान मंदिर परिसर धर्ममय वातावरण और भक्ति भाव से सराबोर रहा।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


