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    अमेरिका करेगा तिब्बत मुद्दे की जांच, चीन के खिलाफ रिपोर्ट की तैयारी

    वाशिंगटन:अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में दोनों प्रमुख पार्टियों (रिपब्लिकन और डेमोक्रेट) के सांसदों ने मिलकर एक नया बिल पेश किया है। 'तिब्बत एट्रोसिटीज डिटरमिनेशन एक्ट' नाम के इस बिल के तहत अमेरिकी विदेश विभाग को यह तय करना होगा कि क्या चीन ने तिब्बत के लोगों के खिलाफ नरसंहार या मानवता के खिलाफ कोई बड़ा अपराध किया है। इस बिल को न्यू जर्सी के रिपब्लिकन प्रतिनिधि क्रिस स्मिथ और न्यूयॉर्क के डेमोक्रेट सांसद टॉम सुओजी ने मंगलवार को सदन में रखा। यह बिल सीनेट में पहले से पेश हो चुके एक दूसरे बिल का ही रूप है, जिसे सीनेटर रिक स्कॉट और जेफ मर्कले ने आगे बढ़ाया था।

    एक साल के अंदर देनी होगी रिपोर्ट

    अगर यह बिल पास होकर कानून का रूप ले लेता है, तो अमेरिकी विदेश मंत्री को एक साल के भीतर संसद (कांग्रेस) को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में तिब्बत के अंदर चीन की सभी गतिविधियों का पूरा आकलन किया जाएगा। इस जांच में सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ स्वतंत्र स्रोतों से मिली जानकारियों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिए जाएंगे कि इस मामले में अमेरिका चीन के खिलाफ क्या कदम उठा सकता है, जैसे कि आर्थिक प्रतिबंध लगाना, अधिकारियों का वीजा रोकना या कोई बड़ी कूटनीतिक कार्रवाई करना।

    इन गंभीर आरोपों की होगी जांच

    इस कानून के बनने के बाद अमेरिकी विदेश विभाग को चीन के कई गंभीर अत्याचारों की जांच करनी होगी। इसमें तिब्बतियों की मनमानी हत्याएं, उन्हें गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुंचाना, अमानवीय परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर करना और बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेना शामिल है। इसके साथ ही जबरन नसबंदी, गर्भपात, और तिब्बती बच्चों को जबरन सरकारी बोर्डिंग स्कूलों में भेजकर उनके परिवारों व समुदाय से अलग करने के आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी, जहां कथित तौर पर उनकी संस्कृति और पहचान को बदलने की कोशिश की जाती है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि चीन किस तरह तिब्बती बौद्ध धर्म, वहां की भाषा और संस्कृति को दबाने की कोशिश कर रहा है।

    मानवाधिकारों की रक्षा के लिए उठाई आवाज

    सांसद क्रिस स्मिथ का कहना है कि चीन लंबे समय से तिब्बत में गंभीर अत्याचार कर रहा है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन अपराधों को साफ तौर पर दुनिया के सामने लाना जरूरी है ताकि जिम्मेदार चीनी अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया जा सके। वहीं, टॉम सुओजी और सीनेटर रिक स्कॉट ने कहा कि चीन की यह कार्रवाई सिर्फ तिब्बत ही नहीं बल्कि वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी एक बड़ा खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तिब्बतियों, उइगर मुसलमानों और हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों के साथ हो रहे बुरे बर्ताव के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।

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