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    विदेशी निवेशकों (FPIs) को रिझाने के लिए सरकार का बड़ा दांव: सरकारी बॉन्ड पर कैपिटल गेन्स टैक्स हटाने की तैयारी

    नई दिल्ली | देश की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर जारी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच और विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने भारतीय सरकारी बॉन्ड (G-Sec) में पूंजी लगाने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स (पूंजीगत लाभ कर) को पूरी तरह से समाप्त करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है।

    यह कदम बाजार में विदेशी डॉलर के प्रवाह (इनफ्लो) को बढ़ाने, डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से कमजोर हो रहे भारतीय रुपये को सहारा देने और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध व कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों से घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए कैबिनेट ने आयकर अधिनियम (इंकम टैक्स एक्ट) में संशोधन हेतु एक अध्यादेश को भी स्वीकृति दे दी है, जो राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा।

    विदेशी निवेशकों को तगड़ा झटका देने वाले पुराने टैक्स ढांचे से मिली मुक्ति

    मौजूदा कर व्यवस्था के अंतर्गत भारत के बॉन्ड बाजार में पैसा लगाने वाले विदेशी निवेशकों को दोहरे टैक्स की मार झेलनी पड़ती थी। यदि कोई विदेशी निवेशक 12 महीने से अधिक समय तक बॉन्ड रखता था, तो उसे $12.5%$ का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) देना होता था। वहीं, 12 महीने से कम अवधि में बॉन्ड बेचने पर श्रेणी के अनुसार $30%$ से $40%$ तक का अत्यधिक शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (STCG) वसूला जाता था। इसके अलावा, ब्याज से होने वाली कमाई पर भी विदेशी निवेशकों को $20%$ विथहोल्डिंग टैक्स चुकाना पड़ता था।

    नया अध्यादेश लागू होने के बाद सरकारी प्रतिभूतियों पर लगने वाला यह कैपिटल गेन टैक्स पूरी तरह से शून्य (0%) हो जाएगा। साथ ही, सरकार विथहोल्डिंग टैक्स को भी आधा करने या उसमें बड़ी ढील देने के लिए एक विशेष राहत पैकेज पर काम कर रही है।

    डॉलर की होगी बरसात, निचले स्तर पर पहुंचे रुपये को मिलेगा बड़ा सहारा

    वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण इस वर्ष अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से लगभग 2.47 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम बिकवाली की है। इस भारी आउटफ्लो के चलते भारतीय रुपया टूटकर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 96.96 प्रति डॉलर पर पहुंच गया है।

    इस कर छूट के बाद सॉवरेन वेल्थ फंड्स और बड़े वैश्विक पेंशन फंड्स भारतीय डेट मार्केट में सालाना 10 बिलियन डॉलर से 30 बिलियन डॉलर (करीब ₹80,000 करोड़ से ₹2.5 लाख करोड़) का नया निवेश ला सकते हैं। जब विदेशी निवेशक भारतीय बॉन्ड खरीदने के लिए बाजार में भारी मात्रा में डॉलर लाएंगे, तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा, जिससे रुपये की गिरती कीमत को थामने और उसे मजबूती देने में मदद मिलेगी।

    बॉन्ड यील्ड में आएगी गिरावट, सरकार का कर्ज संकट होगा कम

    आर्थिक जानकारों और केंद्रीय बैंक (RBI) की सिफारिशों के मुताबिक, इस टैक्स छूट के बाद भारतीय सरकारी बॉन्ड्स की मांग वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने वाली इस खरीदारी से भारत सरकार के बॉन्ड्स की यील्ड (Yield यानी प्रभावी ब्याज दर) में गिरावट दर्ज की जाएगी।

    बॉन्ड यील्ड गिरने का सीधा और सकारात्मक प्रभाव देश के राजकोषीय प्रबंधन पर पड़ेगा। यील्ड कम होने से भारत सरकार को बाजार से नया कर्ज उठाने के लिए पहले के मुकाबले बेहद कम ब्याज चुकाना होगा, जिससे देश के वित्तीय घाटे (फिस्कल डेफिसिट) को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी।

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