झालावाड़ | राजस्थान के झालावाड़ जिले में पुलिस ने मानव तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 10 नाबालिग लड़कियों को तस्करों के चंगुल से सुरक्षित छुड़ा लिया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गिरोह के पांच सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। यह गिरोह गरीब और लाचार परिवारों को पैसों और सुनहरे भविष्य का लालच देकर उनकी बच्चियों को खरीदता था और फिर उन्हें शोषण के दलदल में धकेल देता था।
फर्जी कागजात से बालिग दिखाकर सौदा
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे पुनर्वास अभियान के दौरान एएसआई मदनलाल गुर्जर और हेड कांस्टेबल बाबूलाल को विभिन्न डेरों से इस गिरोह के बारे में गोपनीय जानकारियां मिली थीं। जांच में पता चला कि यह गिरोह कर्ज और तंगी से परेशान माता-पिता को निशाना बनाता था। बच्चियों को अपने कब्जे में लेने के बाद उनके पहचान पत्रों और अन्य सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी की जाती थी। फर्जी तरीके से उनकी उम्र बढ़ाकर उन्हें बालिग दिखाया जाता था और नाम-पते बदल दिए जाते थे, ताकि उनकी असली पहचान पूरी तरह छिप जाए। इसके बाद उन्हें मुंबई और नागपुर जैसे बड़े शहरों के एजेंटों को मोटी रकम में बेच दिया जाता था।
कई राज्यों में नेटवर्क और मौत की शर्त पर आजादी
इस गिरोह का जाल झालावाड़, बूंदी, टोंक समेत मध्य प्रदेश के ग्वालियर और महाराष्ट्र के मुंबई तक फैला हुआ था। रामकन्या बाई नामक महिला एजेंट और कई स्थानीय दलाल गरीब परिवारों को फंसाने का काम करते थे। आरोपियों के पास से बरामद डिजिटल साक्ष्यों और कथित सौदा पत्रों से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इन कागजातों में लिखा था कि यदि कोई लड़की इस चंगुल से भागने की कोशिश करेगी, तो उसके परिवार से भारी रकम वसूल की जाएगी। गिरोह ने ऐसी खौफनाक परिस्थितियां बना रखी थीं कि केवल लड़की की मौत होने पर ही वह इस भंवरजाल से मुक्त हो सकती थी। बच्चियों के सौदे का बड़ा हिस्सा दलाल खुद डकार जाते थे और परिवारों को नाममात्र के पैसे मिलते थे।
मुंबई से अलर्ट के बाद पुलिस की घेराबंदी
जब पुलिस टीम मुक्त कराई गई किशोरियों को वापस ला रही थी, तभी मुंबई के मुख्य सरगनाओं ने स्थानीय दलालों को चौकन्ना कर दिया। इसके बाद कुछ तस्कर लड़कियों को दोबारा अगवा करने की नीयत से झालावाड़ तक पहुंच गए, लेकिन सतर्क पुलिस ने समय रहते जाल बिछाकर उन्हें दबोच लिया। पुलिस के अनुसार, इस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए बरामद दस्तावेजों और मोबाइल फोन की गहन जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े कई और सफेदपोशों और तस्करों की गिरफ्तारी होने की पूरी उम्मीद है, जबकि छुड़ाई गई बच्चियों की सुरक्षा और पुनर्वास के इंतजाम किए जा रहे हैं।


