तीव्र वायरल हेपेटाइटिस, हेपेटिक एन्सेफेलोपैथी व कोगुलोपैथी से जूझ रहे 15 वर्षीय मरीज का सफल उपचार
मिशनसच न्यूज, जयपुर। जगतपुरा स्थित ऋषभ मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने एक जटिल और जीवनरक्षक उपचार को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 15 वर्षीय किशोर को नया जीवन दिया है। प्लाज्मा एक्सचेंज तकनीक के माध्यम से गंभीर लीवर फेल्योर से जूझ रहे मरीज का सफल उपचार कर अस्पताल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. महेंद्र मीणा ने बताया कि दौसा जिले के 15 वर्षीय गोलू मीणा को पेट दर्द, गंभीर पीलिया तथा पिछले सात दिनों से व्यवहार में बदलाव की शिकायत के साथ अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक जांच में मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर पाई गई। लीवर फंक्शन टेस्ट में बिलीरुबिन, एसजीओटी और एसजीपीटी के स्तर सामान्य से कई गुना अधिक मिले, जबकि एबीजी जांच में गंभीर मेटाबोलिक एसिडोसिस की पुष्टि हुई।
अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश मीणा के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने मरीज में तीव्र वायरल हेपेटाइटिस और हेपेटिक एन्सेफेलोपैथी की आशंका को देखते हुए उसे आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया। हालांकि प्रारंभिक उपचार के बावजूद मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई और बिलीरुबिन का स्तर बढ़कर 30 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंच गया।
परिजन मरीज को उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्र भी लेकर गए, लेकिन वहां भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। मरीज को बढ़ते पीलिया, रक्तस्राव विकार (कोगुलोपैथी) और हेपेटिक एन्सेफेलोपैथी के कारण लीवर प्रत्यारोपण के लिए रेफर कर दिया गया।
गंभीर अवस्था में पुनः ऋषभ अस्पताल लाए जाने पर जांच में पीटी-आईएनआर 2.77 और बिलीरुबिन 42 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर पाया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थैरेप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज (टीपीई) करने का निर्णय लिया। उपचार का परिणाम आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक रहा। पहले ही सत्र के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। दूसरे दिन बिलीरुबिन का स्तर घटकर 31 और आईएनआर 1.4 तक पहुंच गया। पांचवें दिन बिलीरुबिन 17 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर रह गया तथा मरीज की चेतना, लीवर कार्यक्षमता और सामान्य स्वास्थ्य में लगातार सुधार दर्ज किया गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार तीव्र वायरल हेपेटाइटिस और गंभीर लीवर फेल्योर की स्थिति में प्लाज्मा एक्सचेंज के माध्यम से सफल उपचार के ऐसे मामले देश में बहुत कम हैं। चिकित्सकों का मानना है कि समय पर सही निदान, आईसीयू आधारित सतत निगरानी और आधुनिक प्लाज्मा एक्सचेंज तकनीक के उपयोग से मरीज को संभावित लीवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता से बचाया जा सका।
डॉ. महेंद्र मीणा ने कहा कि यह सफलता न केवल ऋषभ मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल बल्कि राजस्थान के चिकित्सा क्षेत्र के लिए भी गर्व का विषय है। यह उपलब्धि गंभीर लीवर रोगों के उपचार में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की प्रभावशीलता को भी रेखांकित करती है।
क्या है प्लाज्मा एक्सचेंज?
थैरेप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज (TPE) एक उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें मरीज के रक्त से हानिकारक तत्वों, विषैले पदार्थों और रोग पैदा करने वाले कारकों को हटाकर स्वस्थ प्लाज्मा चढ़ाया जाता है। गंभीर लीवर फेल्योर, कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों और ऑटोइम्यून रोगों में यह तकनीक जीवनरक्षक साबित हो सकती है। समय पर किए गए प्लाज्मा एक्सचेंज से कई मामलों में अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता भी टाली जा सकती है।

