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    भानु सप्तमी 2026: इस दिन ये 5 काम करने से बचें, वरना नहीं मिलेगा सूर्य उपासना का पूरा फल

    आप जीवन में आत्मविश्वास, मान-सम्मान और सफलता की कामना रखते हैं तो भानु सप्तमी का दिन आपके लिए बेहद खास माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को ग्रहों का राजा कहा गया है और उनकी कृपा व्यक्ति के व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा पर सीधा असर डालती है. साल 2026 में अधिकमास की भानु सप्तमी 7 जून को मनाई जाएगी. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ सूर्य उपासना करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और कई तरह की परेशानियों से राहत मिल सकती है.
    वहीं कुछ ऐसी गलतियां भी हैं जो इस शुभ दिन पर सूर्य देव की नाराजगी का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं भानु सप्तमी का ज्योतिषीय महत्व, इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्य और वे गलतियां जिनसे बचना जरूरी माना गया है.
    भानु सप्तमी का ज्योतिषीय महत्व
    ज्योतिष के अनुसार जब सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है तो उसे भानु सप्तमी कहा जाता है. यह दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है. कुंडली में सूर्य आत्मबल, नेतृत्व क्षमता, सरकारी क्षेत्र, पिता, सम्मान और सफलता का कारक ग्रह माना जाता है. मान्यता है कि जिन लोगों की जन्म कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उन्हें करियर में रुकावट, आत्मविश्वास की कमी और सम्मान से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में भानु सप्तमी पर की गई सूर्य साधना विशेष फलदायी मानी जाती है.

    क्यों खास है इस बार की भानु सप्तमी?
    अधिकमास में आने वाली भानु सप्तमी का महत्व और भी बढ़ जाता है. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस दिन की गई पूजा और दान का शुभ प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है. माना जाता है कि सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति के अंदर नई प्रेरणा जागृत होती है.
    भानु सप्तमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
    1. सूर्योदय के बाद देर तक न सोएं
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव अनुशासन और कर्म के प्रतीक हैं. इसलिए भानु सप्तमी के दिन देर तक सोना शुभ नहीं माना जाता. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने और उगते सूर्य को जल अर्पित करने की सलाह दी जाती है.

    2. तामसिक भोजन से दूरी रखें
    इस दिन मांसाहार, शराब, लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक चीजों से परहेज करना चाहिए. सात्विक भोजन मन और शरीर दोनों को शांत रखता है, जिससे पूजा का सकारात्मक प्रभाव बढ़ता है.
    3. किसी का अपमान न करें
    ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सम्मान और प्रतिष्ठा का कारक माना गया है. ऐसे में भानु सप्तमी पर किसी का अपमान करना, कटु शब्द बोलना या क्रोध करना शुभ नहीं माना जाता. इससे सूर्य से मिलने वाले शुभ फल कमजोर हो सकते हैं.
    4. दान-पुण्य से मुंह न मोड़ें
    कई लोग पूजा तो करते हैं लेकिन दान-पुण्य को नजरअंदाज कर देते हैं. मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, जल, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार सहायता देने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं.

    5. सूर्य को अर्घ्य देना न भूलें
    भानु सप्तमी की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा सूर्य अर्घ्य मानी जाती है. तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्पित करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से सूर्य ग्रह मजबूत होने की मान्यता है.
    भानु सप्तमी पर करें ये शुभ उपाय
    1. सूर्य मंत्रों का जाप
    इस दिन “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है. नियमित जाप से मानसिक ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होने की मान्यता है.
    2. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
    रामायण में वर्णित आदित्य हृदय स्तोत्र को सूर्य उपासना का महत्वपूर्ण स्तोत्र माना गया है. भानु सप्तमी पर इसका पाठ विशेष फलदायी बताया गया है.
    3. लाल वस्त्र और गेहूं का दान
    ज्योतिष में लाल रंग सूर्य का प्रतीक माना जाता है. इसलिए लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़ और तांबे से जुड़े सामान का दान शुभ माना जाता है.
    4. जरूरतमंदों की मदद करें
    किसी गरीब व्यक्ति को भोजन कराना, प्यासे को जल पिलाना या जरूरतमंद की सहायता करना इस दिन के श्रेष्ठ कार्यों में गिना जाता है.
    जीवन में कैसे पड़ता है सूर्य का प्रभाव?
    ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि मजबूत सूर्य वाले लोग आमतौर पर नेतृत्व क्षमता से भरपूर होते हैं और समाज में अलग पहचान बनाते हैं. वहीं कमजोर सूर्य व्यक्ति के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. इसलिए भानु सप्तमी को सूर्य ऊर्जा से जुड़ने का विशेष अवसर माना जाता है. भानु सप्तमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आत्मअनुशासन, सकारात्मक सोच और सूर्य ऊर्जा को जीवन में अपनाने का अवसर भी माना जाता है. श्रद्धा, नियम और सेवा भाव के साथ की गई सूर्य उपासना व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी और आत्मबल का संचार कर सकती है.

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