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    डीके शिवकुमार कैबिनेट में पहला बड़ा संकट: बेंगलुरु पोर्टफोलियो न मिलने से नाराज रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा, कहा- ‘बार-बार अपमानित नहीं हो सकता’

    बंगलूरू | कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के कार्यभार संभालने के मात्र तीन दिनों के भीतर ही कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी के पद छोड़ने की घोषणा ने सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। यह विवाद नई सरकार के सामने पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा बनकर उभरा है। हालांकि, शनिवार को रेड्डी के रुख में कुछ नरमी देखी गई। उन्होंने संकेत दिया कि वे अपने त्यागपत्र पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले पार्टी के शीर्ष संगठन और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मध्य चल रही वार्ता के परिणाम की प्रतीक्षा करेंगे। इससे पूर्व, आज सुबह मुख्यमंत्री शिवकुमार ने भी रेड्डी को अपना पुराना मित्र बताते हुए दावा किया था कि गतिरोध को दूर कर लिया गया है।

    विभाग आवंटन से नाराजगी और नेतृत्व की मध्यस्थता

    दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को उस समय मंत्रिमंडल से हटने का मन बना लिया था, जब उन्हें बंगलूरू विकास विभाग के स्थान पर प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। रेड्डी का तर्क है कि उन्होंने स्वयं कभी किसी खास महकमे की पैरवी नहीं की थी, किंतु पूर्व में मिले भरोसे के पूरा न होने से वे आहत हैं। शनिवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला इस उलझन को सुलझाने में जुटे हैं। सुरजेवाला ने उनसे अपना निर्णय बदलने का आग्रह किया है और आलाकमान ने साफ कर दिया है कि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया जाएगा।

    होटल में मंत्रणा और सांगठनिक निष्ठा का हवाला

    रेड्डी ने साझा किया कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री के साथ एक होटल में उनकी मैराथन बैठक हुई थी, जहां दोनों नेताओं ने सभी पहलुओं पर खुलकर बात की। इसके बाद शनिवार को उन्होंने रणदीप सिंह सुरजेवाला के सामने भी उन सभी बिंदुओं को रखा जिन पर मुख्यमंत्री से चर्चा हुई थी। अब मुख्यमंत्री और सुरजेवाला आपस में बैठक कर इन विषयों का हल तलाशेंगे। जब रेड्डी से किसी वैकल्पिक मंत्रालय की पेशकश के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे गोपनीय बताते हुए टिप्पणी करने से मना कर दिया। उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1993 में पहली बार मंत्री बनने से लेकर आज तक उन्होंने कभी भी किसी पद या मलाईदार विभाग के लिए लॉबिंग नहीं की है और आज भी वे अपने इसी सिद्धांत पर कायम हैं।

    सरकार को संकट से उबारने के प्रयास

    त्यागपत्र के फैसले पर अडिग रहने के सवाल को टालते हुए रेड्डी ने कहा कि वर्तमान में मुख्यमंत्री, वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया और सुरजेवाला मिलकर इस विषय पर माथापच्ची कर रहे हैं, इसलिए अंतिम परिणाम सामूहिक विमर्श के बाद ही सामने आएगा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे पूरी तरह संयम में हैं। गौरतलब है कि कैबिनेट विस्तार के बाद मंत्रालयों के वितरण के दौरान उपजे इस असंतोष को थामने के लिए कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है, ताकि सत्ता के शुरुआती दिनों में जनता के बीच सरकार की एकजुटता को लेकर कोई नकारात्मक संदेश न जाए।

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