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    राजस्थान में ट्रैफिक पुलिस की ‘स्ट्राइक’: सड़क सुरक्षा अभियान के पहले ही दिन 4,869 वाहनों पर गाज

    जयपुर | राजस्थान में सड़क परिवहन को अधिक सुरक्षित, सुगम और अनुशासित बनाने के उद्देश्य से प्रदेश पुलिस द्वारा एक विशेष जांच एवं प्रवर्तन अभियान का आगाज किया गया है। आगामी 30 जून 2026 तक संचालित होने वाले इस राज्यव्यापी अभियान के तहत मोटरयान अधिनियम तथा केंद्रीय मोटरयान नियमों की अवहेलना करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान के शुरुआती तीन दिनों में चालकों को नियमों के प्रति जागरूक किया गया, जिसके बाद चौथे दिन से उल्लंघनकर्ताओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया गया है।

    शुरुआती दौर में ही हजारों वाहनों पर दंडात्मक कार्रवाई

    सघन चेकिंग के पहले ही दिन पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर नियम तोड़ने वाले चिन्हित किए गए। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अभियान के प्रथम दिन ही कुल 4,869 वाहनों के विरुद्ध चालान व जब्ती की कार्रवाई की गई। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन वाहनों की रही, जिनके शीशों पर नियमों के विरुद्ध अवैध काली फिल्म चढ़ी हुई थी, ऐसे कुल 2,246 मामले सामने आए। इसके अतिरिक्त 1,372 वाहन ऐसे पाए गए जिनकी नंबर प्लेट का प्रारूप और पंजीयन अंक निर्धारित कानूनी मापदंडों के अनुकूल नहीं थे।

    अवैध मॉडिफिकेशन और हूटर-फ्लैशर पर शिकंजा

    जांच अभियान के दौरान वाहनों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की गई, जिसके तहत 512 वाहन अवैध मॉडिफिकेशन या संरचनात्मक बदलाव के दोषी मिले। इसके साथ ही 313 वाहनों पर अनधिकृत शब्द, पदनाम या स्टिकर लगे पाए गए, जबकि 214 वाहनों पर अवैध रूप से लगाई गई लाल-नीली बत्तियां, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट और हूटर जब्त किए गए। ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले 212 वाहनों को भी पकड़ा गया, जिनमें प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न और एयर हॉर्न का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था।

    सुरक्षा को खतरा और जीरो टॉलरेंस की नीति

    यातायात विभाग के उच्चाधिकारियों का मानना है कि वाहनों में इस प्रकार के अवैध बदलाव, अनधिकृत बत्तियां और तेज आवाज वाले हॉर्न न केवल कानून का मखौल उड़ाते हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा जोखिम पैदा करते हैं। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने इस पूरे जून माह में 'शून्य सहनशीलता' (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाने का फैसला किया है। सभी जिला प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस मुहिम को पूरी कड़ाई से लागू किया जाए और जिन क्षेत्रों में प्रवर्तन कार्य धीमा पाया जाएगा, वहां विशेष निगरानी रखकर कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी।

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