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    INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं होंगे उद्धव ठाकरे, संजय राउत ने बताई वजह

    मुंबई। देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाली 'INDIA' गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक को लेकर महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने बारामती में इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने रेखांकित किया कि मौजूदा समय में देश के प्रमुख दल एक मंच पर आ रहे हैं, जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सत्ता की कमान संभाल रही है, वहीं दूसरी तरफ इस कार्यशैली से असहमति रखने वाले दल एकजुट हो रहे हैं।

    वरिष्ठ नेताओं की मध्यस्थता से सुलझेंगे गठबंधन के आपसी मतभेद

    शरद पवार ने गठबंधन के भीतर समय-समय पर उभरने वाले मतभेदों को सामान्य प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी एकजुटता को बनाए रखने के लिए यह तय किया गया है कि गठबंधन के सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को एक साथ बैठाया जाएगा, ताकि वे आपसी संवाद के जरिए किसी भी विवाद का सर्वमान्य समाधान निकाल सकें। उन्होंने जानकारी दी कि इस अहम बैठक में उनकी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए सुप्रिया सुले दिल्ली पहुंची हैं। इस बैठक के समापन के बाद देश की राजधानी में ही गठबंधन के आगामी राजनीतिक रोडमैप और भावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

    शिवसेना यूबीटी प्रतिबद्ध और उद्धव ठाकरे वर्चुअली जुड़े

    महाराष्ट्र केंद्रित इस सियासी घटनाक्रम में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे इस बैठक में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेने के लिए दिल्ली नहीं पहुंचे। हालांकि, मुंबई से यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस उच्च स्तरीय बैठक में वर्चुअली अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। पार्टी सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) इस मोर्चे की एक बेहद मजबूत स्तंभ बनी हुई है और उनका रुख हमेशा से गठबंधन को एकजुट करने का रहा है। उन्होंने कहा कि सभी दल मिलकर देश के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों का सामना करेंगे और वर्ष 2029 तक सार्थक बदलाव लाएंगे।

    सीटों के समीकरण और कुछ बड़े दलों की अनुपस्थिति

    इस विशेष बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी समय के लिए एक साझा व ठोस रणनीति तैयार करना है, जिसमें कांग्रेस के राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, टीएमसी की ममता बनर्जी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। हालांकि, इस महामंथन के बीच कुछ बड़े झटके भी लगे हैं। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) पहले ही इस गठबंधन से दूरी बना चुकी है, जबकि दक्षिण भारत के एक बड़े सहयोगी दल द्रमुक (DMK) ने भी तमिलनाडु के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और कांग्रेस से पैदा हुई तल्खी के कारण इस बैठक का पूरी तरह से बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

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