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    वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल! खुले कुएं में गिरने से जंगली सुअर की मौत, कई की बचाई गई जान

    सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से वन्यजीवों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां कान्हीवाड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कन्हान पिपरिया में एक बिना मुंडेर के खुले कुएं में अचानक सात जंगली सुअर गिर गए। इस दर्दनाक हादसे में लंबे समय तक पानी में फंसे रहने के कारण एक जंगली सुअर ने दम तोड़ दिया, जबकि बाकी को सुरक्षित निकाल लिया गया है। यह घटना स्थानीय किसान अनिल पाटिल के खेत में हुई, जहां से गुजरते समय सुअरों का यह झुंड गहरे कुएं में समा गया था। हादसे की जानकारी मिलते ही दक्षिण वनमंडल सिवनी और वन विकास निगम की संयुक्त टीम ने फौरन मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया।

    घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित निकाले गए सुअर

    घटना की सूचना पर पहुंचे वन विभाग के अमले ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से एक बेहद जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। कई घंटों की भारी मशक्कत और सूझबूझ के बाद कुएं में फंसे सभी सात जंगली सुअरों को रस्सी और अन्य संसाधनों की मदद से बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, अत्यधिक गहराई, घंटों पानी में फंसे रहने और थकावट के चलते एक जंगली सुअर को नहीं बचाया जा सका और उसकी मौत हो गई। वहीं, रेस्क्यू किए गए अन्य छह जंगली सुअरों को पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद वापस उनके प्राकृतिक आवास यानी घने जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।

    मृत वन्यजीव का कराया गया पोस्टमार्टम

    वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने हादसे का शिकार हुए मृत जंगली सुअर के शव को कब्जे में लेकर उसका विधिवत पोस्टमार्टम करवाया है, ताकि उसकी मृत्यु के सटीक कारणों का वैज्ञानिक खुलासा हो सके। वन अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    खुले कुएं बने वन्यजीवों के लिए काल

    यह दर्दनाक वाकया ग्रामीण और वन्य क्षेत्रों से सटे इलाकों में बिना मुंडेर के खुले पड़े कुओं से जंगली जानवरों को होने वाले जानलेवा खतरों की पोल खोलता है। इस घटना के बाद वन विभाग ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए किसानों और ग्रामीणों से विशेष अपील की है। विभाग ने कहा है कि खेतों में बने कुओं के चारों तरफ सुरक्षा घेरा या मुंडेर का निर्माण अनिवार्य रूप से करवाएं, ताकि भविष्य में किसी भी बेजुबान वन्यजीव की इस तरह असमय मौत न हो सके।

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