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    Homeराज्यमध्यप्रदेशस्लॉटर हाउस विवाद पर हाईकोर्ट का आदेश, निगमायुक्त करेंगे अंतिम फैसला

    स्लॉटर हाउस विवाद पर हाईकोर्ट का आदेश, निगमायुक्त करेंगे अंतिम फैसला

    जबलपुर: राजधानी भोपाल के जिन्सी इलाके में स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस (बूचड़खाना) को दोबारा चालू कराने की कोशिशों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से फिलहाल कोई कामयाबी नहीं मिली है। अदालत ने इस मामले में तत्काल राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने भोपाल नगर निगम (BMC) की कमिश्नर संस्कृति जैन को यह आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ता की तरफ से दिए गए पेंडिंग आवेदन पर अगले 15 दिनों के भीतर कानून के दायरे में रहकर उचित फैसला लें।

    हाई कोर्ट ने दिए एनजीटी के नियमों के पालन के निर्देश

    जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि नगर निगम कमिश्नर जब इस आवेदन पर कोई निर्णय लें, तो वे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा जारी किए गए सभी जरूरी दिशा-निर्देशों और पर्यावरण नियमों का बारीकी से परीक्षण जरूर कर लें। यह आदेश 'लाइव स्टॉक फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड' के संचालक असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा द्वारा दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई के बाद आया है।

    26 टन गोवंश मांस की बरामदगी के बाद लगा था ताला

    इस आधुनिक स्लॉटर हाउस को सील किए जाने के पीछे एक बड़ी कार्रवाई वजह थी। दरअसल, बीते 17 दिसंबर 2025 को पुलिस मुख्यालय के पास से गुजर रहे एक ट्रक से करीब 26 टन प्रतिबंधित गोवंश का मांस बरामद किया गया था। इस गंभीर मामले के सामने आने के तुरंत बाद भोपाल नगर निगम प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिन्सी स्थित इस स्लॉटर हाउस को पूरी तरह सील कर दिया था।

    अनुबंध के उल्लंघन और जल्दबाजी में कार्रवाई का आरोप

    अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील पीयूष तिवारी ने दलील दी कि नगर निगम ने यह पूरी कार्रवाई जल्दबाजी में की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को न तो अपनी बात रखने का कोई मौका दिया गया और न ही 'कन्सेशन एग्रीमेंट' (अनुबंध) के नियमों का पालन किया गया। दूसरी तरफ, शासन की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली और नगर निगम के वकील सुयश मोहन गुरु ने कोर्ट के सामने निगम की इस सख्त कार्रवाई को सही ठहराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी नगर निगम कमिश्नर को सौंप दी है, जिन्होंने कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।

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