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    उम्र बढ़ने की रफ्तार थामने की कोशिश, एंटी-एजिंग इंजेक्शन का पहला मानव परीक्षण

    बोस्टन। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व क्रांति की शुरुआत करते हुए वैज्ञानिकों ने इंसानों पर 'रिवर्स-एजिंग' (उम्र के असर को उलटने) की दवा का पहला क्लिनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है। इतिहास में पहली बार बुढ़ापा रोकने वाले एक विशेष इंजेक्शन को मानव शरीर पर आजमाया गया है। अमेरिकी बायोटेक स्टार्टअप 'लाइफ बायोसाइंसेज' ने घोषणा की है कि उन्होंने सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग (कोशिकाओं के नवीनीकरण) तकनीक पर आधारित इस इंजेक्शन को अपने पहले मरीज की आंख में सफलतापूर्वक इंजेक्ट कर दिया है। यह शुरुआती परीक्षण 'ग्लूकोमा' (काला मोतिया) नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति पर किया गया है।

    इस तरह काम करेगी जीनोम रीप्रोग्रामिंग थेरेपी

    इस अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धति के तहत मरीज की आंख की पुतली में एक एकल जीन थेरेपी (सिंगल जीन थेरेपी) का इंजेक्शन दिया गया है। इसके बाद मरीज को कुछ हफ्तों तक एंटीबायोटिक दवाओं का एक विशेष कोर्स कराया जाएगा। यह एंटीबायोटिक दवाएं शरीर के भीतर जाकर उन तीन उपचारकारी जीनों के लिए 'ऑन स्विच' (सक्रिय करने वाले कारक) का काम करेंगी, जो बूढ़ी हो चुकी कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। मानव परीक्षण से पहले चूहों और बंदरों पर किए गए रिसर्च में इस तकनीक ने जानवरों की आंखों की रोशनी को सफलतापूर्वक वापस लाने में बड़ी कामयाबी हासिल की थी।

    सुरक्षा और साइड इफेक्ट्स की कड़े मानकों पर जांच

    वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की एक विशेष टीम अगले 6 महीनों तक इस मरीज की बेहद बारीकी से निगरानी करेगी। इस लंबी निगरानी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह तकनीक मानव शरीर के लिए कितनी सुरक्षित है और इसके क्या संभावित दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट्स) हो सकते हैं। परीक्षण के लिए मानव आंख को इसलिए चुना गया है क्योंकि यह अंग शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में जैविक रूप से अधिक सुरक्षित और नियंत्रित होता है, जिससे किसी भी प्रकार के बदलाव या साइड इफेक्ट का तुरंत और सटीक आकलन करना बेहद आसान हो जाता है।

    चिकित्सा जगत में नए युग की शुरुआत और बड़े निवेशकों का भरोसा

    'लाइफ बायोसाइंसेज' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के मुताबिक, यह प्रयोग केवल उनकी कंपनी के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के चिकित्सा विज्ञान के लिए एक युगांतरकारी क्षण है। यदि यह क्लिनिकल ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो चिकित्सा के क्षेत्र में उम्र के प्रभाव को कम करने का एक नया दौर शुरू हो जाएगा। इस दीर्घकालिक तकनीक का अंतिम लक्ष्य पूरे मानव शरीर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करना है, ताकि बढ़ती उम्र के साथ डीएनए (DNA) के कमजोर होने की प्रक्रिया को सुधारा जा सके। इस क्रांतिकारी परियोजना की महत्ता को देखते हुए अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस और ओपनएआई (OpenAI) के सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज वैश्विक निवेशकों ने भी इसमें भारी निवेश किया है।

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