पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा अप्रैल 2026 में स्थगित की गई सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी भर्ती परीक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला पर्दाफाश हुआ है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की गहन तफ्तीश में यह बात खुलकर सामने आई है कि इस पूरी परीक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर धांधली की गई थी और पूरा प्रशासनिक तंत्र कथित रूप से परीक्षा माफिया के इशारों पर काम कर रहा था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक मिलान के लिए अधिकृत की गई निजी एजेंसी ने रेंडमाइजेशन (यैंडम चयन) के अनिवार्य नियमों को ताक पर रख दिया। नियमों को दरकिनार कर अंतिम पलों में उन बाहरी और अनधिकृत लोगों को परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर दिया गया, जिनका नाम आधिकारिक सूची में था ही नहीं। इस घोर लापरवाही ने परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं।
परीक्षार्थी ही कर रहे थे बायोमेट्रिक जांच, एजेंसी होगी ब्लैकलिस्ट
जांच एजेंसी ने एक और हैरान करने वाला खुलासा करते हुए बताया कि परीक्षा केंद्रों पर जिन लोगों को बायोमेट्रिक सत्यापन की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उनमें से कई कर्मचारी खुद इसी एईडीओ परीक्षा में बतौर अभ्यर्थी शामिल हो रहे थे। परीक्षा नियमों के तहत ऐसे किसी भी हितधारक को परीक्षा ड्यूटी का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता, इसके बावजूद उन्हें संवेदनशील पदों पर बैठाया गया। इस मामले के सामने आने के बाद जयपुर की बायोमेट्रिक सत्यापन कंपनी 'मेसर्स साईं एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। इस दागी कंपनी को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) करने का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे बिहार सरकार के साथ-साथ देश की अन्य सभी प्रमुख परीक्षा आयोजक संस्थाओं को भी भेजा जा रहा है ताकि वे भविष्य में इसके साथ कोई काम न करें।
35 जालसाज गिरफ्तार और जैमर प्रणाली में भी भारी सेंधमारी
इस महाघोटाले को लेकर अब तक मुंगेर, नालंदा, वैशाली, बेगूसराय और नवादा जिलों में पांच अलग-अलग आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें कार्रवाई करते हुए जांच दल ने अब तक 35 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पकड़े गए लोगों में बायोमेट्रिक कंपनी के कई तकनीकी कर्मचारी, सुपरवाइजर और जिला को-ऑर्डिनेटर शामिल हैं। इसके अलावा, बेगूसराय, छपरा और नालंदा के केंद्रों से ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराए जाने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। ईओयू को तगड़ा अंदेशा है कि परीक्षा हॉल में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों को रोकने के लिए लगाए गए जैमर सिस्टम को जानबूझकर निष्क्रिय या कमजोर किया गया था। इस साजिश में जैमर सेवा प्रदाता कंपनी 'ईसीआईएल' के कर्मचारियों की भूमिका की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
पुराने दागियों को सौंपी कमान, बीपीएससी अधिकारी भी रडार पर
पूरी परीक्षा व्यवस्था को दागी हाथों में सौंपने की बात भी साबित हुई है। मुंगेर में जिला समन्वयक बनाए गए सुजल कुमार और समीर कुमार पहले भी सिपाही भर्ती परीक्षा में हुई धांधली के मुख्य आरोपियों में शामिल थे, जबकि नालंदा के चंदन कुमार को पूर्व में कदाचार (नकल) के आरोप में परीक्षा से बाहर किया जा चुका था। ऐसे आपराधिक इतिहास वाले लोगों को इतनी बड़ी परीक्षा के प्रबंधन का जिम्मा मिलना एक गंभीर साजिश की ओर इशारा करता है। आर्थिक अपराध इकाई अब इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि बीपीएससी (BPSC) के किन अधिकारियों और कर्मचारियों के पास परीक्षा के सुचारू संचालन और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी थी। जांच टीम का कहना है कि आयोग के भीतर बैठे जिन भी चेहरों ने लापरवाही बरती या माफिया का साथ दिया, उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


