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    MP में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर हलचल, कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी तैयारियां

    भोपालमध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत के हालिया फैसले के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा के आयोजन को लेकर अपनी प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस परीक्षा का आयोजन आगामी जुलाई या अगस्त 2026 में किया जा सकता है, जिसमें राज्य भर के लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों के बैठने की संभावना है। इसी सिलसिले में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त ने विभिन्न शिक्षक संघों के पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की और उन्हें विश्वास दिलाया कि शिक्षकों की सुविधा के लिए परीक्षा से जुड़ी तमाम अध्ययन सामग्री इंटरनेट पर ऑनलाइन मुहैया कराई जाएगी, ताकि सभी शिक्षक बिना किसी व्यवधान के घर बैठे ही अपनी तैयारी पूरी कर सकें।

    पुराने नियुक्त शिक्षकों को दायरे में लाने पर कानूनी मंथन

    शिक्षा विभाग इस समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत परीक्षा के नियम और विस्तृत रूपरेखा तैयार करने में व्यस्त है। इसके साथ ही, साल 2005 से 2009 के दौरान व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) के जरिए भर्ती हुए शिक्षकों को इस पात्रता परीक्षा के दायरे में शामिल किया जाए या नहीं, इस पर भी गहन माथापच्ची चल रही है। इस संवेदनशील विषय पर भविष्य की किसी भी कानूनी अड़चन से बचने के लिए विभाग के आला अधिकारी विधि विशेषज्ञों और कानूनी सलाहकारों से राय मशविरा कर रहे हैं। दूसरी तरफ, अदालत के इस आदेश के बाद से ही मध्य प्रदेश समेत पूरे देश के शिक्षक समुदायों में अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता और असमंजस का माहौल बना हुआ है।

    शिक्षक दिवस पर दिल्ली में बड़े आंदोलन की रूपरेखा

    अदालत के इस फैसले के विरोध में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने अब राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े आंदोलन का बिगुल फूंकने की तैयारी कर ली है। शिक्षक संगठन ने अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए आगामी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर देश की राजधानी दिल्ली में एक विशाल विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर और प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के मुताबिक पहली से आठवीं कक्षा तक के सभी शिक्षकों के लिए अब टीईटी पास करना बेहद जरूरी कर दिया गया है, जिससे पुराने शिक्षकों के सामने अपनी नौकरी बचाने का संकट आ खड़ा हुआ है।

    संसद से कानून संशोधन की मांग और देशव्यापी ज्ञापन

    विभिन्न शिक्षक संगठनों की दलील है कि साल 2010 से पहले जिन भी शिक्षकों की नियुक्तियां की गई थीं, वे उस समय के तात्कालिक नियमों के आधार पर पूरी तरह वैध थीं। इसलिए इन पुराने अनुभवी शिक्षकों के सेवा अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को संसद में एक विशेष विधेयक लाकर कानून में आवश्यक संशोधन करना चाहिए। अपनी इसी मुख्य मांग को बुलंद करने के लिए आगामी 18 जून को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में जिला कलेक्टरों के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार से इस पूरे विषय पर हस्तक्षेप कर जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की जाएगी।

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