मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना शहर के वार्ड संख्या 3 में पिछले कई घंटों से विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप होने की वजह से लगभग 300 परिवारों को भीषण गर्मी के बीच अंधेरे में रात गुजारने पर मजबूर होना पड़ा। बिजली की इस गंभीर किल्लत से त्रस्त और आक्रोशित वार्ड के नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कराने सीधे महापौर के सरकारी निवास पर जा पहुंचे और वहां मुख्य द्वार के सामने ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का साफ तौर पर आरोप है कि विद्युत संकट को लेकर उनके द्वारा कई बार बिजली कंपनी के दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और न ही क्षेत्र के किसी जनप्रतिनिधि ने इस विकट समस्या में उनकी सुध लेने की जहमत उठाई।
भीषण गर्मी में त्रस्त जनता और बिजली कर्मियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि चिलचिलाती धूप और उमस भरे मौसम में लाइट न होने से छोटे बच्चों, बीमार बुजुर्गों और महिलाओं की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। इसके साथ ही, वार्डवासियों ने बिजली विभाग के मैदानी कर्मचारियों पर बेहद संगीन और खुले आरोप लगाते हुए कहा कि इलाके में फॉल्ट सुधारने या कोई भी तकनीकी काम करने के एवज में कर्मचारियों द्वारा अवैध रूप से पैसों की मांग (रिश्वत) की जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विद्युत मंडल में बिना सुविधा शुल्क और अनैतिक लेन-देन के आम जनता की किसी भी समस्या का समय पर समाधान नहीं किया जाता, जिससे पूरे विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है।
खेल आयोजनों में व्यस्त रहीं महापौर, पीड़ितों में बढ़ा गहरा असंतोष
धरने पर बैठे पीड़ित परिवारों का गुस्सा उस समय और ज्यादा भड़क गया, जब उन्हें पता चला कि एक तरफ जहां वार्ड के सैकड़ों लोग बूंद-बूंद पानी और रोशनी के लिए तरस रहे हैं, वहीं उनकी समस्याओं का निवारण करने के बजाय महापौर शहर में चल रहे एक स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर व्यस्त थीं। जनता की बुनियादी समस्याओं के प्रति प्रशासनिक मुखिया की इस कथित बेरुखी ने आग में घी का काम किया, जिससे धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं और युवाओं में नगर सरकार के प्रति गहरा असंतोष और नाराजगी देखने को मिली।
उग्र आंदोलन की दी चेतावनी, जिला प्रशासन से दखल की मांग
महापौर निवास के बाहर डटे नागरिकों ने दो टूक शब्दों में स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनके वार्ड की बिजली व्यवस्था को अविलंब दुरुस्त नहीं किया गया और रिश्वतखोरी में लिप्त लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई, तो वे चक्काजाम कर अपने इस आंदोलन को और अधिक उग्र रूप देने के लिए विवश होंगे। प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने, दोषी बिजली कर्मियों को निलंबित करने तथा क्षेत्र में सुचारू विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने की पुरजोर मांग की है। फिलहाल, वार्ड में बिजली संकट और उपजे जनाक्रोश के चलते स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।


